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मैं हूँ स्वछन्द ,नीर की बदरी, जहां चाहे बरस जाऊँगी 
मैं कोई धागा तो नहीं, जो सुई के पीछे आऊँगी | 
मैं  हूँ मस्त पवन कि खुशबू, जहां चाहे बिखर जाऊँगी 
मैं कोई काजल तो नहीं, जो पलकों में सिमट जाऊँगी | 
मैं  हूँ उन्मुक्त सशक्त पतंग, उच्च गगन लहराऊँगी 
मैं कोई मैना तो नहीं, जो पिंजरे बीच कैद हो जाऊँगी | 
मैं  हूँ पाषाण हिय कि नारी, अपनी क्षमता दिखलाऊंगी 
मैं कोई शुष्क लकड़ी तो नहीं, जो आरी से कट जाऊँगी | 
मैं  हूँ आज की शिक्षित नारी, कभी न  शीश झुकाउँगी 
नारी अबला होती है यह, प्रचलित कथन मिटाऊँगी |

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 30, 2012 at 2:12pm

महिमा जी बहुत बहुत आभार आपका |

Comment by MAHIMA SHREE on April 30, 2012 at 1:56pm
मैं हूँ मस्त पवन कि खुशबू, जहां चाहे बिखर जाऊँगी
मैं कोई काजल तो नहीं, जो पलकों में सिमट जाऊँगी |
आदरणीया राजेश दी ..
सुंदर अभिवयक्ति... बधाई स्वीकार करें

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 30, 2012 at 1:05pm
शलेन्द्र कुमार जी हार्दिल आभार कविता को सराहने के लिए 
  
Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 30, 2012 at 12:21pm

मैं हूँ स्वछन्द ,नीर की बदरी, जहां चाहे बरस जाऊँगी
इस शानदार अभिव्यक्ति पर बधाई स्वीकार करें |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 27, 2012 at 1:04pm

aabhar vandana ji bahut bahut shukria.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 27, 2012 at 8:13am

बहुत बहुत आभार छोटू  जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 27, 2012 at 8:13am

बहुत बहुत आभार अविनाश बागडे जी 

Comment by AVINASH S BAGDE on April 26, 2012 at 9:40pm

मैं  हूँ मस्त पवन कि खुशबू, जहां चाहे बिखर जाऊँगी 
मैं कोई काजल तो नहीं, जो पलकों में सिमट जाऊँगी | 

sashakt bhav...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 26, 2012 at 9:09pm

बहुत बहुत आभार गणेश बागी जी |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 26, 2012 at 8:33pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी, बहुत ही ससक्त अभिव्यक्ति है, आज की नारी सब कुछ कर सकती है और करती भी है, इस शानदार अभिव्यक्ति पर बधाई स्वीकार करें |

कृपया ध्यान दे...

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