For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आखिर पुलिस ने उस दुर्दांत आतंकवादी को मार गिराया, उसे मार गिराने वाले पुलिस अफ़सर की बहादुरी की भूरि भूरि प्रशंसा हो रही थी तथा उसके लिए बड़े बड़े सम्मान देने की घोषणाएं भी हो रहीं थी. मीडिया का एक बड़ा दल भी आज उसका साक्षात्कार लेने आ रहा था. इसी सिलसिले में वह बहादुर अफ़सर तैयारियों का जायजा लेने पहुँचा.

"सब तैयारियां हो गईं?" उसने एक अधीनस्थ से पूछा
"जी सर !"
"क्या किसी ने लाश की शिनाख्त की:"
"नहीं सर, चेहरा इतनी बुरी तरह से क्षत विक्षत हो चुका था कि पहचान असंभव थी"
"क्या कोई उसकी लाश लेने पहुँचा था ?"
"जी नहीं सर"
"ओके !, क्या किसी को इस सिलसिले में कुछ कहना या पूछना है?"
तभी एक कांस्टेबल ने धीरे से उस अधिकारी के कानो में कहा:
"उसकी रिक्शा का क्या करें सर?".     

Views: 376

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 3, 2015 at 8:08pm
आखिरी पंक्ति में खुलता सस्पेंस सीधा दिमाग पर असर करता है और कितना कुछ सोचने पे मज़बूर करता है। बेहतरीन लघुकथा। नमन आदरणीय योगराज सर।
Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 7, 2013 at 7:38pm

आदरणीय प्रभाकर सर जी,  वाह सर जी!  क्या खूब?  शानदार, योजनाबध्य तरीके से पुलिस की तत्परता और उत्कृष्ट देश सेवा का इससे अच्छा और क्या मिसाल हो सकता है?  आपकी लेखनी को कोटि-कोटि नमन्! तहेदिल से हार्दिक बधाई स्वीकारें।  सादर,


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 5, 2012 at 5:10pm

आपके उत्साह वर्धन के लिए ह्रदय से आभार भाई अरुण कुमार पाण्डेय "अभिनव" जी.


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 3, 2012 at 12:27pm

उत्साहवर्धन के लिए दिल से आभार दुष्यंत भाई.

Comment by दुष्यंत सेवक on May 3, 2012 at 11:58am

एक अत्यंत ज्वलंत विषय पर एक मर्मस्पर्शी रचना लिखी है आदरणीय प्रधान संपादक सर, यह भी एक पक्ष है आतंक के विरुद्ध लड़ाई का..झूठे श्रेय की होड़ में कई बार ऐसे वाकये भी सामने आते हैं... बहरहाल रचना के लिए बधाई स्वीकारें सर


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 1, 2012 at 2:22pm

भाई शुभ्रांशु जी - सही विश्लेषण किया है.


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 1, 2012 at 2:21pm

आभारी हूँ भाई शैलेन्द्र कुमार मृदु जी...

Comment by Shubhranshu Pandey on May 1, 2012 at 1:13pm

मार गिराया गया एक और आतंकी....... आतंक पैदा कर रहा था.....  अपने रिक्शे से सडकों पर, बेबसी में ..परिवार पर, भाडे के लिये मुसाफ़िर पर,,,,,,,,,,,, अब स्थिती गंभीर किन्तु नियंत्रण में है........

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 30, 2012 at 12:17pm

यथार्थता और संवेदना से ओतप्रोत इस लघु कथा पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय प्रभाकर सर


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on April 29, 2012 at 7:32pm

सादर आभार लड़ीवाला जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
":प्रिय मनोज अच्छे खयालात.... वह इसलिए ही जीत के बेहद करीब है कितने कुचल गये हैं ये उसको पता…"
9 minutes ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट shared Manoj kumar Ahsaas's blog post on Facebook
16 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post चले आओ .....
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार . "
27 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ऐ हवा ....
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , सृजन के भावों को आत्मीय मान एवं सुझाव देने का दिल से आभार . सर पवन के…"
28 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ऐ हवा ....
"आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार l पवन का संशय मैंने दूर…"
32 minutes ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब"
33 minutes ago
Pratibha Pandey posted a blog post

काश हम हवा होते

कुछ तो बात है इन हवाओं में जो तुम्हें छूकर आ रही हैं ,बताती हैं वो कशिश जो तुमसे मिलकर महसूस होती…See More
5 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
5 hours ago
Ram Ashery posted a blog post

न्याय की उम्मीद

जो डूब चुका है कंठ तक झूठ के सवालों में उससे ही हम न्याय की उम्मीद लगा बैठे ।  देश आज फंस चुका है…See More
5 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रस्सा-कशी खेल था जीवन(५८ )
"आदरणीय Samar kabeer साहेब ,आपके आशीर्वचनों से कृतकृत्य हुआ ,सृजन सार्थक हुआ ,सादर आभार…"
16 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post आडंबर - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी। आदाब।"
22 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post सीख - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी। आदाब।"
22 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service