For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कर देंगे वे ठीक, ग़ज़ल की कक्षा में

पाने को कुछ सीख, ग़ज़ल की कक्षा में
हम भी हुए  शरीक़, ग़ज़ल की कक्षा में

पकड़ ही लेंगे  तिलकराजजी चूकों को
बड़ी हों या बारीक, ग़ज़ल की कक्षा में

भूल-भुलैया  भूलों की  जब देखेंगे
कर देंगे  वे ठीक, ग़ज़ल की कक्षा में

ढूंढ  रहे थे कहाँ कहाँ  हम रहबर  को
मिले यहाँ नज़दीक, ग़ज़ल की कक्षा में

"अलबेला"  ने त्याग दिया टेढ़ा रस्ता
चलेंगे सीधी लीक, ग़ज़ल की  कक्षा में 

जय हिन्द !

Views: 806

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Albela Khatri on June 4, 2012 at 9:38pm

shukriya rekha ji.......

Comment by Rekha Joshi on June 4, 2012 at 7:08pm

ढूंढ  रहे थे कहाँ कहाँ  हम रहबर  को 
मिले यहाँ नज़दीक, ग़ज़ल की कक्षा में Albela ji ,badhai 

Comment by chandan rai on June 4, 2012 at 5:14pm
अलबेला जी !
"अलबेला" ने त्याग दिया टेढ़ा रस्ता
चलेंगे सीधी लीक, ग़ज़ल की कक्षा में
बढिया गजल !

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on June 4, 2012 at 4:30pm

भगवान आपके मन की मुराद पूरी करें अलबेला भाई जी.....

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 4, 2012 at 4:28pm

आपका यह विशवास यहाँ हमेशा कायम रहेगा 

गजल हेतु बधाई .

Comment by Yogi Saraswat on June 4, 2012 at 3:39pm

ढूंढ  रहे थे कहाँ कहाँ  हम रहबर  को
मिले यहाँ नज़दीक, ग़ज़ल की कक्षा में

बढ़िया क्लास है ये ! बढ़िया और सटीक शब्द संयोजन आदरणीय श्री अलबेला जी !

Comment by Albela Khatri on June 4, 2012 at 11:31am

वाह वाह उमाशंकर  मिश्रा जी..........
आपने तो  हिम्मत बंधा दी .....
आभार

Comment by UMASHANKER MISHRA on June 4, 2012 at 11:23am

भावनाओं को समझो ऐ मेरे रहबरों

अलबेला हम खड़े, यहाँ तेरी रक्षा में

बढिया गजल बधाई आपको

Comment by Albela Khatri on June 4, 2012 at 11:01am

श्रद्धेय गणेश जी  बागी साहेब,
हज़ार हज़ार शुक्रिया आपका इस मंहगाई  में भी.........जो आपने  त्रुटियों की तरफ़ ध्यान दिलाया . एक दो तो मैंने सुधार दी ..अब बाकी आदरणीय तिलक राज जी से ही कुछ मार्ग दर्शन मिले तो मन खिले...

बहरहाल.........बड़ा ही तेज़ चैनल है ये ओ बी ओ

Comment by Albela Khatri on June 4, 2012 at 10:59am

सम्मान्य महिमा श्री जी,  आपकी सराहना मेरे लिए  प्रमाण-पत्र जैसी है
धन्यवाद

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
20 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
20 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
23 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Feb 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service