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कुछ मुक्तक {मुक्तक काव्य "कमला "}

मुक्तक काव्य "कमला "

मन वीणा को झंकृत करती, मीठा स्पंदन हो कमला
छंदों में रस वर्षा करती, रस अभिवंदन हो कमला
निर्झर की पावन झर झर तुम, हंसती हो सरगम जैसा
साधक है खुद स्वर तेरे तो, तुम स्वर गुंजन हो कमला

तन मलयागिर का चन्दन सा, मुखड़ा कुंदन है कमला
आँखें गहरी सागर जैसी, सुख अभिनन्दन है कमला
केशों में केशव बसते हैं, अधरों में है सुर देवी
जो देखे वो नतमस्तक हो , करता वंदन है कमला

हिरनी के जैसे चंचल है, बिजली सी चमके कमला
चंदा जिससे सकुचाता है, सूरज सी दमके कमला
मोती की दुति कम लगती है, हीरा फीका लगता है
सपने में जब जब आती है , प्रिय मेरी बनके कमला

मोहन की मुरली मीठी सी, कोयल का कलरव है कमला
शारद की वीणा से गुंजित, मृदु स्वर है नवरव है कमला
वाणी से नित रस बहता है, मोहित जो तन मन करता है
स्वर साधक की सुर सरिता का, आवश्यक अवयव है कमला

संदीप पटेल "दीप"

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Comment

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Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on June 27, 2012 at 10:05am

आप सभी आदरणीय स्नेही जनों का ह्रदय से धन्यवाद और आभार
समयाभाव की चलते मैं सभी को प्रथक प्रथक प्रतिक्रया नहीं दे पा रहा हूँ

Comment by UMASHANKER MISHRA on June 25, 2012 at 11:56pm

संदीप जी बेहेतरिन रचना है

मन वीणा को झंकृत करती, मीठा स्पंदन हो कमला
छंदों में रस वर्षा करती, रस अभिवंदन हो कमला
निर्झर की पावन झर झर तुम, हंसती हो सरगम जैसा
साधक है खुद स्वर तेरे तो, तुम स्वर गुंजन हो कमला

कोई कुछ भी समझे मुझे यह किसी पूजा अर्चना से कम नहीं लगी

बधाई संदीप भाई

Comment by Rekha Joshi on June 25, 2012 at 3:11pm

संदीप जी ,

हिरनी के जैसे चंचल है, बिजली सी चमके कमला
चंदा जिससे सकुचाता है, सूरज सी दमके कमला
मोती की दुति कम लगती है, हीरा फीका लगता है
सपने में जब जब आती है , प्रिय मेरी बनके कमला अति सुंदर अभिव्यक्ति ,बधाई 
Comment by Albela Khatri on June 25, 2012 at 10:43am

क्या बात है  संदीप पटेल 'दीप' जी.........
सबसे पहले  तो आपको  प्रतियोगिता में विजयी होने की  बधाई !
आपके मुक्तक   बांच कर आनंद आ गया
___अनेकानेक  बधाइयाँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on June 24, 2012 at 10:12pm

अद्वितीय सौंदर्य वर्णन.संदीप जी आपकी रचना ने मंत्र मुग्ध कर दिया.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 24, 2012 at 1:45pm

आदरणीय संदीप जी, सादर 

डूब गया सागर में निकलूँ तो गीत गाऊं कमला 

कितना सुह्दर सृजन तेरा क्या बतलाऊं कमला 

बधाई,

Comment by आशीष यादव on June 24, 2012 at 1:07pm

waah, behatrin rachna. shayad kisi khas ke liye lagti hai...

कृपया ध्यान दे...

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