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देखना तुझको मुसीबत तो नहीं

देखना तुझको मुसीबत तो नहीं
है मुहब्बत ये शरारत तो नहीं

मर मिटे उसके बदन पर वो मगर
चाहना बस हुश्न चाहत तो नहीं

हार बैठा हूँ जिगर पर ये बता
गैर से तुझको मुहब्बत तो नहीं

छोड़ आया हूँ सभी दुनिया-जहाँ
अब तुझे मुझसे शिकायत तो नहीं

तोड़ के रिश्ते मिले किसको सुकूं
इश्क चाहत है बगावत तो नहीं

देख कर क्यूँ आह भरते हो सनम
इश्क अंदाजे अदावत तो नहीं

खेलना दिल से नहीं आता मुझे
भूलना तेरी "प" आदत तो नहीं

सच छुपा कर झूठ कहना है खता
बात देगी दर्द राहत तो नहीं

जो तुझे रब ही मानता हो उसे
छोड़ जाना यूँ शराफत तो नहीं

मुस्कुराते हो बहुत क्यूँ दीप यूँ
ये छुपी सी दिल-ए-वहशत तो नहीं

संदीप पटेल "दीप"

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 2, 2012 at 11:15pm

तोड़ के रिश्ते मिले किसको सुकूं 
इश्क चाहत है बगावत तो नहीं 

देख कर क्यूँ आह भरते हो सनम
इश्क अंदाजे अदावत तो नहीं 

संदीप जी ये आप का अंदाज बड़ा प्यारा लगता है ...सुन्दर गजल   ..जय श्री राधे 
भ्रमर ५ 

 

Comment by Rekha Joshi on July 2, 2012 at 12:36pm

जो तुझे रब ही मानता हो उसे
छोड़ जाना यूँ शराफत तो नहींउम्दा गजल संदीप जी,बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on July 1, 2012 at 11:58pm

जो तुझे रब ही मानता हो उसे
छोड़ जाना यूँ शराफत तो नहीं

देखना तुझको मुसीबत तो नहीं
है मुहब्बत ये शरारत तो नहीं

शानदार गज़ल में इन दो अश'आरों ने दाद देने को मजबूर कर दिया.

शक  हो  रहा  है  ,   जरा  सच कहो

मोहब्बत का पहला ये खत तो नहीं

Comment by Raj Tomar on July 1, 2012 at 7:49pm

उम्दा गज़ल है पटेल साब. और ये भी अच्छी बात है.
हार बैठा हूँ जिगर पर ये बता
गैर से तुझको मुहब्बत तो नहीं. "
मतलब अभी ही बता दो. कहीं हमारी सारी मेहनत पर पानी तो नहीं फिर जायेगा. :p
वाह वाह.. :)

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