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जिनके लिए हमने दिल औ जान लुटाई .

मिली  सिर्फ  उनसे हमको है  बेवफाई |
...............................................
सजदा किया उसका निकला वो हरजाई ,
मुहब्बत के बदले पायी  हमने रुसवाई |
...............................................
धडकता है दिले नादां सुनते ही शहनाई,
पर तक़दीर से हमने तो  मात  ही खाई |
................................................
न भर नयन तू आग तो दिल ने है लगाई ,
धोखा औ फरेब फितरत में, दुहाई है दुहाई,|
................................................
छोड़ गए क्यूँ तन्हां दे कर लम्बी जुदाई,
जी लेंगे बिन तेरे ,काट लेंगे सूनी तन्हाई |

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Comment

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Comment by Rekha Joshi on July 10, 2012 at 1:55pm

आदरणीय हरीश जी ,सादर नमस्ते ,प्रोत्साहन बढ़ाने पर आपका हृदय से आभार 

Comment by Harish Bhatt on July 10, 2012 at 1:43pm

आदरणीय रेखा जी नमस्‍ते

जिनके लिए हमने दिल औ जान लुटाई .

मिली  सिर्फ  उनसे हमको है  बेवफाई |
सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई
Comment by Rekha Joshi on July 6, 2012 at 8:11pm

सूरज जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया ,ऐसे ही स्नेह बनाये रखे ,आभार 

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on July 6, 2012 at 8:02pm

रेखा जी सुंदर भावपूर्ण रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

Comment by Rekha Joshi on July 6, 2012 at 4:56pm

दीप्ती जी ,आपका आभार 

Comment by deepti sharma on July 6, 2012 at 4:51pm

बहुत खुबसूरत कविता  शुभकामनायें

Comment by Rekha Joshi on July 6, 2012 at 4:44pm

सुरेन्द्र जी ,धन्यवाद 

Comment by Rekha Joshi on July 6, 2012 at 4:42pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी ,सादर नमस्ते ,,आपके कमेंट्स से मुझे प्रेरणा मिलती है ,आभार 

Comment by Rekha Joshi on July 6, 2012 at 4:36pm

आदरणीय प्रदीपजी,रचना पसंद आने पर बहुत बहुत धन्यवाद 

Comment by Rekha Joshi on July 6, 2012 at 4:32pm

राकेश जी ,सादर नमस्ते ,

दर्द की क्या कहें ,बहुत सह लिए ,
आलम यह कि अब दर्द दवा बने ,आपका बहत बहुत शुक्रिया 

कृपया ध्यान दे...

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