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नीले नभ पर .,

उड़ चले पंछी ,
इक लम्बी उड़ान,
संग साथी लिए ,
निकल पड़े सब,
तलाश में अपनी ,
थी मंजिल अनजान .
अनदेखी राहों में 
जब हुआ सामना, 
था भयंकर तूफ़ान 
घिर गए चहुँ ओर से , 
और फ़स गए वो सब ,
इक ऐसे चक्रव्यूह में ,
अभिमन्यु की तरह ,
निकलना था मुश्किल ,
पर बुलंद हौंसलों ने ,
कर दिया नवसंचार ,
उन थके हारे पंखो में ,
भर दी इक नयी ताकत ,
उस कठिन घड़ी में ,
मिलकर उन सब ने ,
अपने पंखों के दम पे ,
टकराने का तूफान से ,
था साहस दिखलाया,
अपने फडफडाते परों से,
था तूफ़ान को हराया ,
हिम्मत और जोश लिए 
बढ़ चले वह  फिर से,
 इक अनजान डगर पे |

Views: 680

Comment

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Comment by Rekha Joshi on July 6, 2012 at 5:57pm

आदरणीय डा प्राची जी ,सादर अभिनंदन ,सराहना पर आपका बहुत बहुत धन्यवाद ,आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 6, 2012 at 5:49pm
अपने फडफडाते परों से,
था तूफ़ान को हराया ,.....
बहुत सुन्दर आ. रेखा जी, इस साहसी सोच पर बधाई.
Comment by Rekha Joshi on July 6, 2012 at 5:40pm

सौरभ जी ,सराहना के लिए आपका आभार 

Comment by Rekha Joshi on July 6, 2012 at 5:38pm

प्रदीप जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 6, 2012 at 12:09am

आपके प्रयास पर साधुवाद, रेखाजी.

Comment by Pradeep Kumar Kesarwani on July 5, 2012 at 11:50pm

अति सुंदर ...

Comment by Pradeep Kumar Kesarwani on July 5, 2012 at 11:48pm

काबिले तारीफ...

Comment by Rekha Joshi on July 5, 2012 at 5:01pm

बहुत बहुत धन्यवाद अरुण जी ,आभार 

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 5, 2012 at 4:23pm

बेहद सुन्दर रचना

Comment by Rekha Joshi on July 5, 2012 at 11:51am

योगी जी ,सादर नमस्ते ,मै वह प्रोग्राम देखती हूँ ,ऐसे ही प्रेरणादायक कमेंट्स देते रहिये ,आभार 

कृपया ध्यान दे...

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