For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ज्ञान का प्रकाश दे जो दीप वो जलाइए

देश हित वाली बात हिल-मिल सुनाइए
ज्ञान का प्रकाश दे जो दीप वो जलाइए

देश पर विदेशियों की रीत न चलाइए
मान सम्मान अपने देश का बचाइये

अपना संस्कारों वाला देश नव बनाइये
रीत औ रिवाजों वाले गीत अब गाइए

छोटों को गरीबों को कभी मत सताइए
हो सके तो उनको भी गले से लगाइए

संदीप पटेल "दीप"

Views: 427

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 12, 2012 at 12:15pm

आप सभी आदरणीय मित्रों और अग्रजों का ह्रदय से बहुत बहुत धन्यवाद और सादर आभारी हूँ
समयाभाव की वजह से सबको प्रथक प्रथक टिपण्णी न कर पाने का सदैव ही खेद रहता है
किन्तु आप अपना स्नेह और आशीर्वाद यूँ ही मेरी रचनाओं पर बनाये रखिये
आपके दिए बेशकीमती समय का ऋणी हूँ

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 12, 2012 at 11:58am

सुन्दर आलोकित करती सार्थक रचना पर हार्दिक बधाई दीप जी!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 12, 2012 at 9:35am

संदीप जी सुन्दर छंद बध रचना ..बधाई 

Comment by Albela Khatri on July 12, 2012 at 9:17am

वाह वाह वाह वाह
बहुत खूब संदीप पटेल दीप जी.........

छोटों को गरीबों को कभी मत सताइए
हो सके तो उनको भी गले से लगाइए

__शानदार रचना  !
बधाई !

Comment by UMASHANKER MISHRA on July 11, 2012 at 11:21pm

बहुत खूब संदीप पटेल जी

आपने इस छंद के माध्यम से राष्ट्रीयता की अलख जगा दी

हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 11, 2012 at 10:23pm

छोटों को गरीबों को कभी मत सताइए
हो सके तो उनको भी गले से लगाइए

सुन्दर सन्देश संदीप जी 
हो सके तो नहीं... 
उन्हें भी मुख्य धारा में लाइए सिखाईये पढ़ाइये 
विकसित विकासशील प्यारे तब ही कहाइये 
भ्रमर ५ 

 

Comment by Rekha Joshi on July 11, 2012 at 9:41pm

संदीप जी 

छोटों को गरीबों को कभी मत सताइए
हो सके तो उनको भी गले से लगाइए,अति सुंदर रचना ,बधाई 
Comment by deepti sharma on July 11, 2012 at 7:07pm

वाह बहुत खूब 

बधाई आपको 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
yesterday
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
Tuesday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
Tuesday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Apr 11
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service