For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कभी अपने नाखून देखे हैं
अपने अल्फाजों के नाखून
हाँ यही बहुत पैने हैं तीखे हैं
चुभते हैं
ज़रा तराश लो इन्हें
इनकी खरोंचों से चुभन होती है
ये विदीर्ण कर जाते हैं
मेरे मोम से कोमल ह्रदय को
बेकार ही इन्हें बढ़ाई जा रही हो
आखिर किसे भायेगा ये नखक्षेदन
इन्हें तराश लो
देखो इनका पैनापन सहने की क्षमता
मेरे मोम से ह्रदय में तो नहीं है
तराश लो न इन्हें
आखिर कब तक इन्हें चुभो चुभो के
मेरे मन को विदीर्ण करती रहोगी
तराश लो न इन्हें

"दीप"

Views: 576

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by आशीष यादव on July 14, 2012 at 10:42pm

वाह सर, एक बहुत अच्छी उपमा। यह प्रयोग वाकई काफी अच्छा लगा।
बधाई स्वीकारिये

Comment by Arun Sri on July 14, 2012 at 8:27pm

बढे हुए नाखून तो सुंदरता के लिए आवश्यक हैं उनकी नज़र में ! उन्हें कटवाएँगे तो वो आप ही को छोड़ जाएगी ! :-)) :-))

बहुत अच्छी कविता मित्र ! वास्तव में नाखून वाले शब्द आत्मा तक घायल कर जाते हैं ! बढ़िया प्रस्तुति !

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 14, 2012 at 11:38am

आदरणीय भ्रमर जी
मेरी इस कविता को आपका स्नेह प्राप्त हुआ
आपके प्रतिक्रिया के शब्द मुझे लिखने के लिए प्रेरित करते हैं
अपना ये असीम स्नेह यूँ ही बनाये रखिये
आपका सादर आभार

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 13, 2012 at 11:23pm

अपने अल्फाजों के नाखून 
हाँ यही बहुत पैने हैं तीखे हैं 
चुभते हैं 
ज़रा तराश लो इन्हें 
इनकी खरोंचों से चुभन होती है 
ये विदीर्ण कर जाते हैं 
मेरे मोम से कोमल ह्रदय को 

संदीप जी खूबसूरत ....बहुत अच्छा सन्देश देती रचना ..आइये तराश लें ..अपनी जिह्वा पर नियंत्रण रख ..

भ्रमर ५ 

 

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 5:56pm



Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 13, 2012 at 5:54pm

आदरणीय अलबेला सर जी
आपकी प्रतिक्रिया का प्रसाद मिला मुझे
मन प्रसन्न हो गया
चित्त में सुखद अनुभूति हुई है
आपका ये स्नेह यूँ ही अनवरत मुझ पर बनाये रखिये
आपका कोटि कोटि धन्यवाद सहित आभार

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 5:49pm

भाई संदीप पटेल दीप जी.......
बड़ी कोमलकान्त अभिव्यक्ति कर दी आपने........
हाय रे इस अदा पर कौन न मर मिटे........

आखिर कब तक इन्हें चुभो चुभो के
मेरे मन को विदीर्ण करती रहोगी
तराश लो न इन्हें

__बहुत सुन्दर काव्य,,,,,,,,,,,,बधाई मेरे भाई.....

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 13, 2012 at 5:42pm

आदरणीया डॉ साहिबा आपको लेखन पसंद आया
मेरा मनोबल बढ़ गया
अपना स्नेह यूँ ही  अनुज पर बनाये रखिये आपका बहुत बहुत धन्यवाद और सादर आभार


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 13, 2012 at 4:32pm

बहुत सुन्दर सटीक बिम्ब... सुन्दर रचना के लिए बधाई आ. दीप जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Tuesday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Tuesday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service