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श्रद्धाजलि -

(दीवाना रूप मस्ताना प्यार जिसका )
 
बसर करता रहा जो  जिंदगी-
अपनी अदा से,
लुटाता रहा प्यार जो,
अपनी नजर से,
चाहता रहा प्यार जिसका-
हर मस्ताना .
लगता रहा रूप जिसका,
सबको दीवाना  
कह गए वो सबको-
जिंदगी एक सफ़र है सुहाना |
अब जितनी बार याद.
वे आयेंगे ,
बन जायेंगे प्रतिबिम्ब-
उतनी ही बार जहन में
बस अब हंसते हंसते जीना  
और, हँसते हँसते मरना ही 
होगी उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि |
 
.लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला

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Comment

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 20, 2012 at 9:10am

श्री सौरभ पाण्डेय जी,श्री गणेश जी बागी, और  सीमा जी अग्रवाल आप सभी का हार्दिक आभार 

भाई श्री सुरेन्द्र भ्रमर जी आपका ब्लॉग देखा बहुत सुन्दर रचनाओ का संग्रह है | समय निकल कर 
पढूंगा | हार्दिक धन्यवाद |

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 20, 2012 at 8:59am

सादर श्रद्धांजलि .. .

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 20, 2012 at 12:27am

आदरणीय लक्ष्मण जी अभिवादन सच में अच्छाइयों पर सदा श्रद्धा सुमन बरसते रहेंगे ...यादें तो रह ही जाती हैं ...

भ्रमर ५ 

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 19, 2012 at 10:27am

सादर श्रद्धांजलि .. .

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