For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

व्याजोक्ति [लघु कथा ]

आलोक की बहन रीमा के पति के अचानक अपने घर परिवार से दूर पानीपत में हुए निधन के समाचार ने आलोक और उसकी पत्नी आशा को हिला कर रख दिया |दोनों ने जल्दी से समान बांधा ,आशा ने अपने ऐ टी म कार्ड से दस हजार रूपये निकाले और वह दोनों पानीपत के लिए रवाना हो गए ,वहां पहुंचते ही आशा ने वो रूपये आलोक के हाथ में पकड़ाते हुए कहा ,''दीदी अपने घर से बहुत दूर है और इस समय इन्हें पैसे की सख्त जरूरत होगी आप यह उन्हें अपनी ओर से दे दो और मेरा ज़िक्र भी मत करना कहीं उनके आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचे''|अपनी बहन के विधवा होने पर अशोक बहुत भावुक हो रहा था ,उसने भरी आँखों से चुपचाप वो रूपये अपनी बहन रीमा के हाथ थमा दिए | देर रात को रीमा अपनी बहनों के साथ एक कमरे में सुख दुःख बाँट रही थी तभी आशा ने उस कमरे के सामने से निकलते हुए उनकी बाते सुन ली, उसकी आँखों से आंसू छलक गए ,जब उसकी नन्द रीमा के शब्द पिघलते सीसे से उसके कानो में पड़े ,वह अपनी बहनों से कह रही थी ,''मेरा भाई तो मुझसे बहुत प्यार करता है , आज मुसीबत की इस घड़ी में पता नही उसे कैसे पता चल गया कि मुझे पैसे कि जरूरत है ,यह तो मेरी भाभी है जिसने मेरे भाई को मुझ से से दूर कर रखा है |

Views: 877

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rekha Joshi on July 24, 2012 at 12:10pm

आदरणीया राजेश जी ,आपने सही लिखा है ,लेकिन आजकल जिंदगी की आपाधापी में किसी को समझने का समय ही नही है अगर सब एक दूसरे को समझने लगें तो रिश्तों की मिठास बरकरार रहे गी ,आपका बहुत बहुत आभार 

Comment by Rekha Joshi on July 24, 2012 at 11:49am

संदीप जी ,आपका आभार 

Comment by Rekha Joshi on July 24, 2012 at 11:48am

आशीष जी ,यही तो विडम्बना है ,समाज में लोगों की सोच बहुत छोटी है ,आपको कथा पसंद आई ,आभार 

Comment by Rekha Joshi on July 24, 2012 at 11:43am

आदरणीय बागी जी ,सादर नमस्ते ,आपकी बधाई स्वीकार की ,आपके अनमोल सुझावों के लिए मै हृदय से आभारी हूँ ,आपका बहुत बहुत धन्यवाद  

Comment by Rekha Joshi on July 24, 2012 at 11:32am

सतीश जी ,आपका बहुत बहुत धन्यवाद 

Comment by Rekha Joshi on July 24, 2012 at 11:31am

आदरणीय अम्बरीश जी .सादर नमस्ते ,आपको यह लघु कथा पसंद आई ,आपका बहुत बहुत धन्यवाद ,ऐसे ही उत्साह बढ़ाते रहिये ,आभार  

Comment by Rekha Joshi on July 24, 2012 at 11:27am

आदरणीय सौरभ जी ,सादर नमस्ते  ,आपका कमेन्ट मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है ,आभार 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on July 24, 2012 at 10:35am

बहुत सुन्दर लघुकथा कही है रेखा जोशी जी. कहानी अपना सन्देश देने में भी सफल रही है जिसके लिए मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें. गणेश बागी जी ने बहुत महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, उन पर अवश्य ध्यान दें. दरअसल लघुकथा एक ऐसी विधा है जिसमे एक भी फालतू शब्द कहानी की सुन्दरता घटा सकता है. उदहारण के लिए आपकी इस कहानी में पानीपत का दो बार ज़िक्र आना तथा एटीएम से पैसे निकलवाने की बात को अगर नहीं भी कहा जाता तो कोई फर्क न पड़ता. बल्कि कहानी और चुस्त और सधी हुई बन जाती. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 24, 2012 at 10:22am

आज  के समाज में कुछ रिश्ते इतने शुष्क  हो गए हैं की लोग मन में एक धारणा बना कर बैठ जाते हैं जैसा की इस कहानी में चाहे ननद भाभी हो या सास बहु एक दूसरे के बीच दिलों में दूरी का एहसास होता है मुझे यह  वार्तालाप में दूरी के कारण अधिक लगता है जहां दो इंसान दिल खोलकर एक दूसरे से बात नहीं करेंगे वहां दुनिया भर की भ्रांतियां पैदा हो जाती हैं जिसके कारण कई समस्याएं रिश्तों में कडवाहट भर देती हैं जैसा की इस कहानी में यदि भाभी ने कभी दिल खोलकर बातचीत के माध्यम से अपनी ननद को आत्मीयता दिखाई होती तो ननद ये शब्द कभी ना कहती इसका सीधा सा मतलब है ननद अपनी भाभी को कभी समझ ही नहीं पाई या भाभी ने कभी समझाया ही नहीं -------------आपकी कहानी बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करती है --------बहुत ही अच्छा लिखा है आपने आपको हार्दिक बधाई 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 24, 2012 at 10:16am

अच्छी लघु कथा के लिए बधाई आपको आदरणीया रेखा जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
6 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service