For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

 

(सूर घनाक्षरी एक प्रयास)

कानों में रस घोलती, कोयल की मीठी तान,

अमवा पे है बोलती,  मान या ना मान.

                             .

दादीमाँ ने नुस्खे लिखे,ज्यों औषधियों की खान,

घर  में ही  सब मिले,मान या ना मान.

                             .

संकट में जो साथ दे, तू भाई उसे ही जान,

यूँ तो भाई अनेक हैं, मान या ना मान.

                             .

 जीवन पल चार हैं, रखना मन में ध्यान,

पल ही बीत जाएगा, मान या ना मान.

                             .

है ईश्वर सब कहें, पर ना माने विज्ञान,

 प्रभु नाम से ही तरें, मान या ना मान.

                            .

विदा अतिथि ना करें, दिए बिना जलपान,

प्रभु अतिथि एक है, मान या ना मान.

Views: 739

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 27, 2012 at 11:26pm

धन्यवाद आदरणीय अशोक कुमार जी! छंद का सन्दर्भ देते हुए उसे पोस्ट करने के लिए आपके प्रति हार्दिक आभार, सादर

Comment by Rekha Joshi on July 27, 2012 at 10:23pm

आदरणीय अशोक जी ,सादर

 है ईश्वर सब कहें, पर ना माने विज्ञानं 
 प्रभु नाम से ही तरें, मान या ना मान.,अति सुंदर रचना ,बहुत बहुत बधाई 
Comment by Ashok Kumar Raktale on July 27, 2012 at 6:57pm

आदरणीय अम्बरीश जी

                          सादर, इसी मंच पर भारतीय छंद विधान  के अंतर्गत आदरणीय शैलेन्द्र कुमार सिंह 'मृदु' द्वारा इसका उल्लेख  किया है उसी में उदाहरण बतौर कवि सूरदास जी का छंद भी प्रस्तुत किया गया है.

परसि परमानंद , सीचि के  कामना कंद,

करहिं प्रगट प्रीति, प्रेम के प्रवाल.

बचन रचन हास, समन सुख निवास,

करहि फलहिं फल,अभय रसाल...     

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 27, 2012 at 6:33pm

आदरणीय अशोक कुमार जी,

जिसे आपने 'सूर घनाक्षरी' कहा है, उससे मैं पूर्व परिचित नहीं हूँ |

फिर भी प्रवाह स्पष्ट करने के उद्देश्य से इससे मिलती जुलती  ८,८,८,६ पर यति वाली डॉ० श्याम गुप्त की घनाक्षरी प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे उन्होंने 'श्याम घनाक्षरी' नाम दिया है ......जो कि एक उदाहरण मात्र है .......

थर थर थर थर , कांपें सब नारी नर,
आई फिर शीत ऋतु , सखि वो सुजानी |
सिहरि सिहरि उड़े ,जियरा पखेरू सखि ,
उर मांहि उमंगाये , पीर वो पुरानी |
बाल वृद्ध नारी नर, धूप बैठे तापि रहे ,
धूप भी है कुछ खोई, सोई अलसानी |
शीत की लहर तीर भांति तन बेधि रही,
मन उठै प्रीति की वो, लहर अजानी ||  -- डॉ० श्याम गुप्त  

यदि संभव हो तो किसी प्राचीन व स्थापित कवि की ३० वर्ण की ,८,८,८,६ पर यति के साथ अंत में लघु गुरु के बंधन से मुक्त घनाक्षरी प्रस्तुत करें ताकि हम सब इसके सटीक प्रवाह से भली-भांति परिचित हो सकें ! सादर

Comment by AVINASH S BAGDE on July 27, 2012 at 4:42pm

है ईश्वर सब कहें, पर ना माने विज्ञान,

 प्रभु नाम से ही तरें, मान या ना मान.

विदा अतिथि ना करें, दिए बिना जलपान,

प्रभु अतिथि एक है, मान या ना मान...bahut khoob Ashok bhai..मान या ना मान

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 27, 2012 at 2:07pm

दादीमाँ ने नुस्खे लिखे,ज्यों औषधियों की खान,

घर  में ही  सब मिले,मान या ना मान.

विदा अतिथि ना करें, दिए बिना जलपान,

प्रभु अतिथि एक है, मान या ना मान.

प्रिय अशोक भाई ..सुन्दर सीख और सन्देश दे गयी आप की घनाक्षरी प्यारी ....इसके मर्म .रूप के बारे में  तो गुनी जन ही चर्चा  करेंगे 
जय श्री राधे 
भ्रमर ५ 
Comment by Ashok Kumar Raktale on July 27, 2012 at 12:31pm

आदरणीय अम्बरीश जी

                           सादर, सूर घनाक्षरी के बारे में मेरी अल्प जानकारी के मुताबिक़ यह वर्णात्मक छंद ३० वर्ण का,८,८,८,६ पर यति के साथ अंत में लघु गुरु के बंधन से मुक्त होता है. अधिक जानकारी सदैव अपेक्षित है. प्रवाह पर भी आपके सुझाव का सम्मान करते हुए इसे ठीक करने का प्रयास करूँगा.आभार.

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 27, 2012 at 12:21pm

आदरणीय अलबेला जी,दीप्ति जी,संदीप जी, राजेश कुमारी जी, अरुण जी आप सभी का छंद रचना सराहने के लिए आभार.

 

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 27, 2012 at 11:57am

अशोक जी उम्दा रचना, बहुत-२ बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 27, 2012 at 10:58am

बहुत सुन्दर भाव युक्त बेहतरीन छंद 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Monday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service