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ओ. बी. ओ. के सभी गुरुजनों, मित्रों एवं पाठकों को मेरा विन्रम प्रणाम. आज ओ. बी. ओ. पर काफी दिनों के बाद मेरा आना हुआ है. और ऐसा महसूस हो रहा है कि एक भूला-भटका राही अपने खुशहाल घर वापस आ गया, जहाँ बड़ों का आशीष है, स्नेह है, सहयोग है और कदम- 2 पर साथ है. हाइकु लिखने की पहली कोशिश है मालुम नहीं ठीक है या गलत, आशा करता हूँ कि आप सब मार्गदर्शन अवश्य करेंगे.

सादर
अरुन शर्मा

पराया धन
बढ़ाता परेशानी
मन में चिंता

बुरी नज़र
जलाती तिल तिल 
प्रेम संसार

क्रोधित मन
समझता कब है
अपनी भूल

ज्ञानी ह्रदय
बड़ा शांत स्वभावी 
प्रकृति जैसा 

फूल के पीछे
पड़ी हवा दिवानी
भौंरा पागल

शाम - सबेरे
है ठण्ड झकझोरे
शीत ऋतु की 

घूमा मंदिर
भगवान को पाया
मन भीतर

माँ की ममता
अथाह पारावार
पार न पाए

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Comment

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Comment by अरुन 'अनन्त' on December 17, 2012 at 12:01pm

आदरणीय अशोक सर सब यहीं से सीख रहा हूँ, आगे भी सीखने की कोशिश जारी है बस आप सभी का स्नेह और आशीष बना रहा रहे.

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 16, 2012 at 12:21am

ज्ञानी ह्रदय
बड़ा शांत स्वभावी 
प्रकृति जैसा 
वाह! क्या बात है बहुत सुन्दर हाइकू के लिए सादर  बधाई स्वीकारें अरुण जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 3, 2012 at 5:07pm

शुक्रिया - शुक्रिया आदरणीय डॉ. बाली सर

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on December 3, 2012 at 4:11pm

अरुण जी आपने मानवीय भावनाओं को बहुत अच्छे शब्दों से उकेरा है इन हाइकु के माध्यम से। 

अच्छा प्रयाश ।

बधाई हो !

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 3, 2012 at 1:36pm

आदरणीय योगराज सर आपका आशीष मिल गया मैं धन्य हुआ, माँ सरस्वती की कृपा से और आदरेया प्राची जी की बातों को ध्यान में रखते हुए, अगली बार और बेहतर लिखने का प्रयास करूँगा.


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 3, 2012 at 1:25pm

कथ्य और शिल्प की दृष्टि से बहुत बेजोड़ और सारगर्भित हाइकु कहे हैं भाई अरुण शर्मा जी, मेरी हार्दिक बधाई स्वीकारें। डॉ प्राची सिंह जी की बात पर भी अवश्य ध्यान दें।

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 3, 2012 at 12:55pm

आदरेया प्राची जी सराहना हेतु आपका शुक्रिया और जो बारीकी आपने मुझे हाइकू के बारे में बताई है इससे मैं अभी तक अनभिज्ञ था मार्गदर्शन हेतु आपका अनेक-2 धन्यवाद.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 3, 2012 at 12:37pm

हाइकू विधा पर आपका प्रथम प्रयास सराहनीय है अरुण शर्मा जी

हाइकू लिखते हुए समय दो बातों का ध्यान बहुत ज़रूरी है, पहली ये की तीनों पंक्तिया अपने आप में स्वतंत्र अस्तित्व रखें. ऐसा नही लगना चाहिए कि एक ही पंक्ति को तोड़ कर दो भागों में लिखा गया है...

जैसे , 

फूल के पीछे 
पड़ी हवा दिवानी 
भौंरा पागल....इस हाइकू में लग रहा है.

दूसरी बात, यदि प्रथम पंक्ति और तीसरी पंक्ति सम्तुकांत हो, तो हाइकू की गेयता बेहद निखर जाती है.

इन बातों का ध्यान रख बहुत सुन्दर हाइकू लिखे जा सकते हैं. भावों की सघनता के लिहाज से आपने बहुत अच्छे हाइकू लिखे है. बधाई इस सद्प्रयास हेतु 

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 3, 2012 at 11:02am

आदरणीय लक्ष्मण सर  सराहना एवं हौंसला आफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 3, 2012 at 10:59am

आदरणीय अरुण सर सराहना हेतु अनेक-2 धन्यवाद

कृपया ध्यान दे...

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