For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रवि  किरणों  को कंटक सम  चुभता   

 नोच डाला  गिद्धों ने जो गिरी का बदन

करते हैं दोहन उसकी भुजाओं का 

कैसे दिखाए नदी शिव को अपना वदन

जब चाहा संहार किया काटी ग्रीवा   

आज चुपचाप बिलखते हैं अरण्य सघन

मासूम गंगा की छीन ली पावनता  

बहाते  गन्दगी धुलते  मैले कुचैले  वसन  

शून्य धरा शून्य अम्बर बचा क्या 

प्रदूषित जल ,पर्यावरण , प्रदूषित पवन 

क्या दोगे धरोहर अगली पीढ़ी को 

कुछ तो बचा लो ,सुनो क्या कहे  अंतर्मन

***************************************

 

Views: 439

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 16, 2012 at 8:57am

आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी हार्दिक आभार आपका |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 16, 2012 at 8:56am

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी रचना पसंद करने हेतु हार्दिक आभार आपका 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 16, 2012 at 1:24am

इस आर्त पुकार पर हार्दिक बधाई.

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 16, 2012 at 12:18am

पावन सरिता गंगा कि होती दुर्दशा पर चिंता प्रकट करती रचना पर बधाई स्वीकारें आद. राजेश कुमारी जी.सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 15, 2012 at 5:28pm

अन्वेषा जी हार्दिक आभार आपकी अनमोल टिपण्णी हेतु 

Comment by Anwesha Anjushree on December 15, 2012 at 4:34pm

Shabdheen...........


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 3, 2012 at 7:38pm

आदरणीय डॉ .सूर्या बाली जी आपकी उत्साह वर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए दिल से शुक्रिया 

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on December 3, 2012 at 4:16pm

राजेश कुमारी जी नमस्कार बहुत सुंदर रचना....बेहद संजीदा और साहित्यिक रचना के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें।

खास कर ये पंक्तियाँ बहुत उम्दा हैं....

प्रदूषित जल ,पर्यावरण , प्रदूषित पवन 

क्या दोगे धरोहर अगली पीढ़ी को ... 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 3, 2012 at 2:11pm

प्रिय प्राची जी मेरी रचना पर आपकी उपस्थिति और प्रतिक्रिया मेरी कलम में मानो  उर्जा की तरंगे लेकर आई हैं उत्साह वर्धन हेतु दिल से आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 3, 2012 at 12:19pm

बहुत बहुत बधाई आदरणीया राजेश कुमारी जी, पर्यावरण की दिन प्रति दिन प्रदूषित होती स्थिति को इतनी संवेदनशीलता के साथ इस काव्य में समेटने के लिए....काश सबका अंतर्मन यह ज़रूर सुने..की पृथ्वी जो हमें जीवन देती है, उसको हमने इस लायक भी नहीं छोड़ा की वो हमारे आगे आनी वाली पीड़ीयों को भी यूं ही सम्हाल सके.... जल वायु धरती सब बिलख रहे है..

इस संवेदनशील सन्देश हेतु पुनः बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
3 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
3 hours ago
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
Friday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
Friday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
Friday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service