For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कटेगी सिर्फ़ दिलासों से ज़िंदगी कब तक

कटेगी सिर्फ़ दिलासों से ज़िंदगी कब तक।

रहेगी लब पे ग़रीबों के खामुशी कब तक॥

 

वरक़ पे आने को बेताब हो रहा है अब,

रहेगा हाशिये पे आम आदमी कब तक॥

 

न जाने कब ये बुराई का सिर क़लम कर दें,

सहेंगे लोग सियासत की गंदगी कब तक॥

 

मुझे डराएगा अब और कब तलक दुश्मन,

रहेगी खौफ़ के साये में हर खुशी कब तक॥

 

दमक रही है उजालों से शहर की बस्ती,

न जाने पहुंचेगी गाँवों में रौशनी कब तक॥

 

के माना दौरे-अमीरी है शानदार बहुत,

घुटन के दौर से निकलेगी मुफ़लिसी कब तक॥

 

ख़ुदा तलाश करो आएगा नज़र दिल में,

करोगे मील के पत्थर की बंदगी कब तक॥

 

शहीद होते रहें, मसअले का हल तो नहीं,

निभाई जाएगी सरहद पे दुश्मनी कब तक॥

 

निकल तो आयेगा “सूरज” भी सुब्ह होने तक,

अमीरे शहर बचाएगा चाँदनी कब तक॥

                       

डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

Views: 450

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 17, 2012 at 9:47am

आदरणीय डॉक्टर साहब

                            सादर, बहुत सुन्दर गजल. बरबस मुझे एक गीत कि  पंक्ति याद आ रही है " वो सुबहा कभी तो आयेगी वो सुबह............" हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on December 11, 2012 at 1:33pm

मुझे डराएगा अब और कब तलक दुश्मन,

रहेगी खौफ़ के साये में हर खुशी कब तक॥

 बहुत खूब 

बधाई, सर जी 

काफिया रदीफ जाना 

सिखाते रहिये 

Comment by वीनस केसरी on December 11, 2012 at 12:32am

बेहद शानदार ग़ज़ल है भाई वाह वाह वा
क्या कहने ....

एक एक शेअर को कई कई बार पढ़ा और झूम झूम गया
शुरुआत के कई अशआर तो बेहद खूबसूरत हुए हैं
मज़ा आ गया
तहे दिल से दाद क़ुबूल करें

 

करोगे ईंट पत्थरों की बंदगी कब तक॥.... भाई, इस मिसरे पर नज़रे सानी फरमा लें

Comment by ajay sharma on December 10, 2012 at 10:52pm

शहीद होते रहें, मसअले का हल तो नहीं,

निभाई जाएगी सरहद पे दुश्मनी कब तक॥   wah wah wah 

Comment by नादिर ख़ान on December 10, 2012 at 3:48pm

शहीद होते रहें, मसअले का हल तो नहीं,

निभाई जाएगी सरहद पे दुश्मनी कब तक॥

 

निकल तो आयेगा “सूरज” भी सुब्ह होने तक,

अमीरे शहर बचाएगा चाँदनी कब तक॥

उम्दा रचना के लिए बधाई स्वीकार करे भाई सूर्या बाली जी ..

 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on December 10, 2012 at 3:01pm

निकल तो आयेगा “सूरज” भी सुब्ह होने तक,

अमीरे शहर बचाएगा चाँदनी कब तक॥

बहुत खूब सर जी, बधाई 

         

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 10, 2012 at 2:32pm

वाह वाह वाह आदरणीय बाली साहब आपकी पोटली से निकली और ह्रदय के भीतर जा बसी आपकी यह ग़ज़ल, ढेरों-2 दाद कुबूल करें.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। आपकी…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रस्तुति का सहज संशोधित स्वरूप।  हार्दिक बधाई"
13 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रदत्त चित्र को आपने पूरे मनोयोग से परखा है तथा अंतर्निहित भावों को…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी, आपने प्रस्तुति के माध्यम से प्रदत्त चित्र को पूरी तरह से शाब्दिक किया है…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, आपकी प्रस्तुति का हार्दिक धन्यवाद  परन्तु, रचना सोलह मात्राओं खे चरण…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण भाईजी, चौपाई छंद में आपने प्रदत्त चित्र को उपयुक्त शब्द दिये हैं. सुगढ़ रचना के…"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार। तुकांतता के दोष में…"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। आपकी…"
17 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक धन्यवाद आभार आपका लक्ष्मण भाईजी"
17 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक धन्यवाद लक्ष्मण भाई "
17 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी आदरणीय अशोक भाईजी  चौपाई में चित्र का  सम्पूर्ण  चित्रण हुआ है।…"
17 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चप्पल उसकी सिली न जाती। बिन चप्पल के वह रह जाती।।....वाह ! वाह ! प्रदत्त चित्र की आत्मा का भाव आपने…"
19 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service