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चिड़िया थी उत्साह में, सम्मुख था आकाश
किन्तु स्वप्न धूसर हुए, तार-तार विश्वास !

तार-तार विश्वास,  मगर जीवन  चलता है.. .
भूमि भले  हो  रेह,  पुलक  टूसा  खिलता है ;
जुगनू-तितली-फूल, किरन हँसती सिन्दुरिया,
ले आया  नव वर्ष, चहकती फिर से चिड़िया.. .

**********

-सौरभ

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 1, 2013 at 12:02pm

आदरणीय रजनीशसचान साहब, यह कोई भयंकर दुर्घटना है क्या ?

तब ’ष’ और ’ख’ के तुक को क्या करेंगे. तुलसी बाबा तो गये काम से ? हम पद्य धर्म निभायें, आदरणीय.

Comment by rajneesh sachan on January 1, 2013 at 11:47am

नव वर्ष की शुभकामनायें ....
मगर साहब ...आकाश के साथ विश्वास ??
कैसे?

Comment by Shyam Narain Verma on January 1, 2013 at 11:13am

नववर्ष की बधाई  और  मंगलकामनाएं  !

Comment by MAHIMA SHREE on January 1, 2013 at 11:01am

आदरणीय सौरभ सर ,  नमस्कार ,

 नववर्ष की बहुत  बधाईयाँ  और  मंगलकामनाएं 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 31, 2012 at 10:50pm

आमीन.. . 

आदरणीय अशोक भाईजी.

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 31, 2012 at 10:50pm

सादर शुभकामनाएँ, सीमाजी

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 31, 2012 at 8:50pm

आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, बस यही कामना है चिड़िया फिर से खुश हो कर चहके.नव वर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएं.

Comment by seema agrawal on December 31, 2012 at 8:18pm

शुभकामनाएं ........

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