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मंगल मय हो नूतन वर्ष - लतीफ़ ख़ान

लिख कर अनुभव पत्रिका पार क्षितिज के पुराना साल गया |
ले कर कोरे पृष्ठ सहस्त्र देखो आया है फिर साल नया |
    हों सम्बंध नए हों अनुबंध नए,
    नव निर्मित बंधों के हों तटबंध नए,
    इक नई कथा लिखें इक नई प्रथा लिखें,
    जीवन पृष्ठ पर लिखें नित छंद नये,
दुःख बिसराने सुख बिखराने देखो आया है फिर साल नया |
लिख कर अनुभव पत्रिका पार क्षितिज के पुराना साल गया |
    हो दर्श नया हर्ष नया उत्कर्ष नया,
    जो भी रचें हम, रचें सहर्ष नया,
    उन्नति के नित नए आयाम गढ़ने,
    सृजन पथ पर हो नित संघर्ष नया,
कुछ सुलझाने कुछ समझाने देखो आया है फिर साल नया |
लिख कर अनुभव पत्रिका पार क्षितिज के पुराना साल गया |
    हो अभिलाष नया हो विश्वास नया,
    नूतन गढ़ने का हो प्रयास नया,
    शूल शलाका समूल नष्ट हो जाए,
    वन उपवन में हो मधुमास नया,
रस बरसाने मन महकाने देखो आया है फिर साल नया |
लिख कर अनुभव पत्रिका पार क्षितिज के पुराना साल गया |
    छल प्रपंच के व्याकरण न सीखें,
    हम सीखें प्रेम की नई परिभाषा,
    घृणा द्वेष के मन गणित भुला कर,
    पर पीड़ा उन्मूलन की हो अभिलाषा,
कुछ सिखलाने कुछ दिखलाने देखो आया है फिर साल नया |
लिख कर अनुभव पत्रिका पार क्षितिज के पुराना साल गया |

शुभाकांक्षी...लतीफ़ ख़ान (दल्लीराजहरा)

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Comment

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Comment by अरुन 'अनन्त' on January 6, 2013 at 1:49pm

आदरणीय लतीफ़ सर नव वर्ष प्रस्तुत गीत बहुत मनमोहक और सुन्दर है हार्दिक बधाई.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 5, 2013 at 3:23pm

लेकर कोरे पृष्ठ सहस्त्र देखो आया है फिर साल नया..

यह मुख्य पंक्ति बहुत सुन्दर है, नए वर्ष की नवीनता को संजोये...बहुत बहुत बधाई 

नव वर्ष पर सुन्दर सपनों से सजे इस गीत के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय लतीफ़ खान जी.

नव वर्ष के हार्दिक शुभकामनाएं.

Comment by लतीफ़ ख़ान on January 5, 2013 at 10:42am

आप सभी आदरणियों का धन्यवाद |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 5, 2013 at 10:25am

लिख कर अनुभव पत्रिका पार क्षितिज के पुराना साल गया

सकारात्मक पंक्तियों से लबालब गीत के लिए आपका सादर आभार, आदरणीय लतीफ़ खान साहब. नव वर्ष की अनेकानेक शुभकामनाएँ और बधाइयाँ. आप सपरिवार सानन्द, स्वस्थ और संतुष्ट रहें.

सादर

Comment by Ashok Kumar Raktale on January 5, 2013 at 8:57am

आदरणीय लतीफ खान साहब सादर, नव वर्ष पर सुन्दर गीत की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकारें साथ नव वर्ष की शुभकामनाएं.सादर.

Comment by satish mapatpuri on January 5, 2013 at 1:59am

छल प्रपंच के व्याकरण न सीखें, हम सीखें प्रेम की नई परिभाषा, घृणा द्वेष के मन गणित भुला कर, पर पीड़ा उन्मूलन की हो अभिलाषा, कुछ सिखलाने कुछ दिखलाने देखो आया है फिर साल नया | लिख कर अनुभव पत्रिका पार क्षितिज के पुराना साल गया | ... काश ! ऐसा ही हो . आपकी दुआओं में मैं भी अपना स्वर मिला रहा हूँ खान साहेब . नववर्ष की हार्दिक बधाई .

Comment by SUMAN MISHRA on January 4, 2013 at 5:12pm

श्री खान जी आपकी  रचना नव वर्ष की नयी प्रस्फुटित कली की तरह सुंगंध से भरी हुयी बहुत सुंदर रचना है...बधाई सर

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on January 4, 2013 at 4:02pm

बहुत सुन्दर रचना लिखी है आपने साहब
बहुत बहुत बधाई आपको

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