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मौन का,इम्तिहान न लो ..!!

नोंच डालो ,
अस्मिता को ,बेच डालो ,
हम यही कहते रहेंगे
मौन का ...
इम्तिहान न लो ..!!
सूरज से युद्ध 
करने का  दुस्साहस
करता जुगनू प्रतिदिन
आकाश बँधाता ढाढस
ज़ुल्म हम सहते रहेंगे ,
हम यही कहते रहेंगे
शौर्य का
अनुमान न लो ..!!
चीखती रह जाएँगीं
विधवा घाटियाँ
जर्जर सी छत की
छूट गईं लाठियाँ
प्रतीक्षारत ,आक्रमण का
अनुचित परिणाम न हो
हम यही कहते रहेंगे ,
हौसले का ,
अनुमान न लो ..!!
मौन का,इम्तिहान न लो ..!!

-भावना-

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Comment

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 13, 2013 at 11:18am

सामयिक घटनाओं पर आपकी अच्छी पकड़ है, उन्ही घटनाओं से निकालकर यह कविता आपने बहुत ही खूबसूरती से प्रस्तुत की हैं, हम केवल कहते रहेंगे.....सहनशीलता का इम्तहान न लो, और वो कहेंगे...इम्तहान ही तो ले रहे हैं उत्तीर्ण होकर दिखाओं.....हमारे पास तो बहुत सहनशीलता बाकी है उत्तीर्ण तो हो ही जायेंगे |

इस खुबसूरत अभिव्यक्ति पर बधाई स्वीकार करें आदरणीया भावना तिवारी जी ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 11, 2013 at 12:55pm

नमस्कार
आप प्रतिक्रया सही जगह दे रही हैं
पर यदि हिंदी में देंगी तो अच्छा होगा.

Comment by भावना तिवारी on January 11, 2013 at 12:52pm

AADARNIYAN Dr.PRACHI JI ....HAMEN YAHAN PAR PRATIKRIY ADENA NAHIN AATA .....AAPKA BAHUT BAHUT SHUKRIYA ADAA KARTI HOON ...KYA PRATIKRIYA ISI COMMENT BOX MAIN LIKHIN JAATIN HAIN ..KRIPYAA AVGAT KARAIYEGA ....YAHAN KE NIYAMON AUR QAAYDON SEY POORI TARAH AWGAT NAHIN HAIN HAM ....!!  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 11, 2013 at 12:41pm

मौन की प्रचंड शक्ति की सशक्त अभिव्यक्ति डॉ. भावना जी, हार्दिक बधाई 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on January 10, 2013 at 3:41pm

आदरणीया भावना जी,

सादर 

सच ही कहा, बस अब और नहीं.

बधाई 

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