For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

धीर धरे चुप गहन कूप
होतीं हैं बेटियाँ ../
गंगा की जलधार सीं ,
अर्घ्य की पावनधार सीं ,
जीवन के आधार सीं .
भोर सजीली भक्ति रूप
होतीं हैं बेटियाँ ..!!
सुभग अल्पना द्वार कीं,
सजतीं वंदनवार सीं/
महकें हरसिंगार सीं ,
जीवन भर की छाँह -धूप
होतीं हैं बेटियाँ ..!!
बाबा के सत्कार सीं ,
मर्यादा परिवार कीं ,
बेमन हैं स्वीकार सीं ,
धीर धरे चुप गहन कूप
होतीं हैं बेटियाँ ...!!!

Views: 75

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अरुन शर्मा 'अनन्त' on January 17, 2013 at 11:01am

बेहद सुन्दर और सुखदाई गीत हार्दिक बधाई आदरणीया

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on January 16, 2013 at 9:25pm

अत्यन्त भावपूर्ण रचना.........भावना जी हार्दिक बधाई स्वीकारें !!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 16, 2013 at 8:40am

बहुत सुन्दर भावपूर्ण शब्दों की लडियां पिरोई हैं बेटियों के लिए इस रचना में दिल को छू गई बहुत बहुत बधाई 

Comment by vijay nikore on January 15, 2013 at 6:16pm

मर्यादा परिवार कीं ,
बेमन हैं स्वीकार सीं ,
धीर धरे चुप गहन कूप
होतीं हैं बेटियाँ ...!!!

अत्युत्तम भाव हैं।

बधाई।

विजय निकोर

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on January 15, 2013 at 3:52pm

बहुत सुन्दर बात कही है आपने एकदम सरल शब्दों में बेटियों के लिए लिखी अनुपम रचना बधाई हो

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on January 15, 2013 at 10:58am

भावना जी, सुन्दर भाव, हार्दिक बधाई, दरअसल बेटी शब्द ही सुन्दर भाव का अहसास करता है 

सरिता सी बहती, बहती ही जाती 
पराये घर को भी सहेजती, अपनाती 
सीधी सरल, बल खाती भी चलती जाती 
पलती पोषण करती, न घबराती बेटियाँ 
मरकर भी देजाती दामिनी से ये बेटियाँ - लक्ष्मण लड़ीवाला 

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 15, 2013 at 9:50am

बहुत प्रेम पूर्वक, शब्द शब्द में अनुभूति को ढाल कर बेटियों के लिए लिखी गयी इस रचना के लिए हार्दिक बधाई डॉ भावना तिवारी जी 

Comment by Pankaj Trivedi on January 14, 2013 at 11:31pm

भावना, बेटियाँ .... मेरी दो-बेटियाँ है... बड़ी कोमल और संवेदनशील.... प्रत्येक शब्द महसूस करता हूँ .. सुंदर गीत


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 14, 2013 at 11:22pm

बेटियों के प्रति भावभरी पंक्तियों के लिए हार्दिक बधाई, भावनाजी, और इस प्रस्तुति हेतु अनेकानेक शुभकामनाएँ.. .

Comment by Ashok Kumar Raktale on January 14, 2013 at 10:29pm

बेटियों कि परिवार में स्थिति पर लिखी सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकारें.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की
"आभार आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आपका , सादर नमन "
7 hours ago
रामबली गुप्ता commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - मैं उसकी ताब से खो कर हवास बैठा था ( गिरिराज भंडारी )
"वाह वाह आद0 गिरिराज भाई जी। बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
7 hours ago
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त

विश्व पटल की बात तो छोडो , भारत के सर्वस्व भूमि पर , त्याग आपसी रंजिश को , हर मुख हिंदी कब गायेगा ?…See More
Thursday
Ravindra Pandey commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"बन के लहू ये....... अत्यंत सुन्दर अभिव्यक्ति... हार्दिक बधाई स्वीकार करें... @बासुदेव जी...."
Thursday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर posted photos
Thursday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)

भाषा बड़ी है प्यारी जग में अनोखी हिन्दी, चन्दा के जैसे सोहे नभ में निराली हिन्दी। पहचान हमको देती…See More
Thursday
Mohit mishra (mukt) commented on Manan Kumar singh's blog post हिंदी की हकीकत(लघु कथा)
"हकीकत को जीवंत करती सार्थक रचना। बधाई "
Thursday
Profile IconMilind Padki, Subhash Chandra Lakhera and Ajay Singh Rana joined Open Books Online
Thursday
Ashok Kumar Raktale added a discussion to the group पुस्तक समीक्षा
Thumbnail

समीक्षा : 'मन में भरो उजास'

“मन में भरो उजास” – कुण्डलिया छंद संग्रहछंदकार – सुभाष मित्तल ‘सत्यम्’प्रकाशक – बोधि प्रकाशन,…See More
Thursday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted a blog post

निहारता तो हूँ तुम्हें, चोरी से चुपके से- गजल, पंकज मिश्र

1212 1212 222 222निहारता तो हूँ तुम्हें, चोरी से चुपके सेविचारता तो हूँ तुम्हें, झपकी ले चुपके…See More
Thursday
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
Thursday
Manan Kumar singh posted a blog post

हिंदी की हकीकत(लघु कथा)

हिंदी की हकीकत*****विभाग(संस्था) में राजभाषा के कार्यान्वयन की समीक्षा का कार्यक्रम चल रहा था।…See More
Thursday

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service