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आंसू ...........ख़ुशी को ये भिगाते हैं ग़मों को ये जलाते हैं

ख़ुशी को ये भिगाते हैं ग़मों को ये जलाते हैं
बिना बोले कभी आंसू बहुत कुछ बोल जाते हैं
समझने के लिए इनको मोहोब्बत का सहारा है
......नहीं तो देखने वाले तमाशा ही बनाते हैं ||

सिसक हो बेवफाई की कसक चाहे जुदाई की
पिघलता है सभी का दिल हवन की आहुती जैसे
ख़ुशी नमकीन पानी से अधिक रंगीन बनती है
कभी आंसू लगे सैनिक कभी हो सारथी जैसे ||

कहीं जब दूर जाए लाडला माँ से जुदा होकर
बहाए प्रेम के मोती दुआएं जब निकलती हैं
करे जब याद माँ का घर बहू जो बन गयी बेटी
मिलन की प्यास आँखों में सम्हाले ना सम्हलती है ||

सुहागन सेज पर बैठी अकेली याद में उनकी
जुदाई की अमावास में अकेली रात को रोये
कभी अंगड़ाइयाँ देती गवाही प्रेम उत्सव की
तपिश बीते हुए कल की जलाए आग जो सोये ||

कभी जब भाव वंदन का बना- जगदीश के घर पर
बरसता है समर्पण प्रेम का मोती निगाहों में
समझने के लिए बचता नहीं कुछ गीत गोपी का
किशन को मांगती क्यूँ थी बुलाती थी दुआओं में ||

हजारों रंग के एहसास हैं- लाखों कहानी है
कोई कीमत समझता है कोई कीमत लगाते हैं
ये मोती प्यार के भी हैं कभी तकरार के भी हैं
ख़ुशी को ये भिगाते हैं ग़मों को ये जलाते हैं ||

समझने के लिए इनको मोहोब्बत का सहारा है
......नहीं तो देखने वाले तमाशा ही बनाते हैं ||
..............मनोज

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Comment by Ashok Kumar Raktale on February 3, 2013 at 10:00pm

कहीं जब दूर जाए लाडला माँ से जुदा होकर
बहाए प्रेम के मोती दुआएं जब निकलती हैं........सुन्दर.

आदरणीय मनोज जी सादर, आंसू ख़ुशी और गम दोनों ही जगह बराबरी से उपस्थिति देते हैं. सुन्दर रचना. बधाई स्वीकारें.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 3, 2013 at 6:25am

मनोज भाईजी, बहुत-बहुत खूब !

ख़ुशी नमकीन पानी से अधिक रंगीन बनती है
कभी आंसू लगे सैनिक कभी हो सारथी जैसे ||

इन पंक्तियों के लिए विशेष-विशेष बधाई.. .

जब भाव वंदन का बना- जगदीश के घर पर .. इस पंक्ति को देखियेगा, रुक्ने सदर में १२ के वज़्न का कोई शब्द छूट रहा है. संभवतः वह शब्द कभी हो सकता है...  कभी जब भाव वंदन का. बना- जगदीश के घर पर .. .

सादर

Comment by MAHIMA SHREE on February 2, 2013 at 10:29pm

सिसक हो बेवफाई की कसक चाहे जुदाई की
पिघलता है सभी का दिल हवन की आहुती जैसे
ख़ुशी नमकीन पानी से अधिक रंगीन बनती है
कभी आंसू लगे सैनिक कभी हो सारथी जैसे ||

बहुत ही अच्छी रचना  आदरणीय मनोज बधाई आपको..

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 2, 2013 at 7:15pm

क्या बात है सुन्दर रचना हेतु बधाई आपको आदरणीय

Comment by ram shiromani pathak on February 2, 2013 at 6:50pm

बहुत ही भावपूरण रचना है..हार्दिक बधाई मनोज bhai 

Comment by vijay nikore on February 2, 2013 at 2:57pm

भाव बहुत अच्छे लगे।

विजय निकोर

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 2, 2013 at 12:06pm

सुन्दर भावो की अभ्व्यक्ति के लिए बधाई मनोज नौटियाल जी 

Comment by Aarti Sharma on February 2, 2013 at 12:15am

बहुत ही भावपूरण रचना है..हार्दिक बधाई मनोज जी..

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