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अब रंग रंग के फूल खिले हैं,

मेहनत कर रहा  माली |

बरसों से था आस लगाये,

रब कब महकेगी डाली |

तड़के उठ कर  बाग़ सजाये,

आ जाती है  घर वाली |

हरा भरा है  बाग़ सुहावन,

देख मनाएं  खुशिहाली |

फूलों पर मधुप गुनगुनाते,

झूम  वसंती  रागों में  |

देख इठलाती तितलियों को,

मन घुल जाये पागों में |

आम मंजरी से रस बरसे,

महके वातावरण सारा |

मधुर पवन के झोंके में बस,

टिकोरा लगे है  प्यारा |

होली गीत सुनाये कोयल,

झूम झूम के डाली में |

आ बुलबुल चहकें  शाखों पर,

फिर जोश भरें  माली में  |

जाड़ा गरमी बरसातों में,

लगा रहा दिन रातों में |

फूल देखने की चाहत में,

उलझा ना पर बातों में |

मेहनत से मिल गयी मंजिल,

अब तो खुशी मनायेगा |

कैसे बिता रात दिन उसका,

दुनिया को बतलायेगा |

मेहनत तो सभी करते हैं,

पर विरले  मंजिल पाते |
वर्मा बस  नसीब के  मारे,

पसीना बहा पछताते ।


श्याम नारायण वर्मा

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Comment

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Comment by pawan amba on March 3, 2013 at 2:00pm

मेहनत से मिल गयी मंजिल,

अब तो खुशी मनायेगा |

कैसे बिता रात दिन उसका,

दुनिया को बतलायेगा |...achhi hai...

Comment by रविकर on March 3, 2013 at 12:56pm

परिश्रम दिख रहा आदरणीय-
शुभकामनाएं-

Comment by Dr.Ajay Khare on March 2, 2013 at 3:43pm

badia rachana badhai

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on March 1, 2013 at 9:43pm
आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी!
भाव के दृष्टिकोण से तो मैं आपको बधाई देता हूं,
लेकिन बुरा मत मानियेगा(जहां तक मैं समझता कि उसी तरह से बात करने जरा हूं),किन्तु इसे हम ढंग की कविता भी नहीं कह सकते।क्या रचना पर थोड़ा और समय नहीं दिया जाना उचित न होगा?
सादर
Comment by SALIM RAZA REWA on March 1, 2013 at 9:25pm

मेहनत तो सभी करते हैं,

पर विरले  मंजिल पाते |

achi rachna hai  verma ji

 

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