For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 29 में प्रस्तुत गीत का सस्वर गायन ..........सीमा 

;

Views: 696

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 5, 2013 at 6:51pm

आदरणीया सीमा जी,

एक बार, दो बार , बार बार इतना सुन्दर भावप्रवण गीत आपकी इतनी मधुर आवाज में सुनकर बस मन मुग्ध है.....बहुत बहुत बढ़िया, पूरे उतार चढ़ाव के साथ भावों को बहुत खूबसूरती से उभारते हुए गाया है आपने...

इस सुन्दर गायन के लिए दिल से बहुत बहुत बधाई..

आप मंच से बीच बीच में गायब हो जाती हैं.... आपकी रचनाओं का बहुत इंतज़ार रहता है. अब तो आपके गायन का भी रहेगा.

सादर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 5, 2013 at 6:49pm

भाव, शब्द, कथ्य, तथ्य, शिल्प हर विन्दु से संतुलित इस गीत पर काव्य महा-उत्सव आयोजन के दौरान ही बहुत कुछ कहा-सुना जा चुका है.

गीत के सस्वर निवेदन में सीमाजी का स्वर, उनके स्वर की लयात्मकता, उस लय की सधी हुई आवृति तीनों समुच्चय में कर्णप्रिय तो लगे ही हैं, इस संप्रेषण-संसृति में रचनानुरूप भावभरा अपेक्षित ठहराव भी सहज प्रतीत होता है, जो श्रोता की एकाग्रता को थामे रहता है. स्वरांजलि में यह ठहराव मानों एक निर्दोष हठ लिये हुए है, मौन की वाचालता को भावजन्य आयाम देता हुआ. .. शब्द जब थकने लगें मैं तब सुनाऊँगा हृदय की..  ..  तब तक के लिए ..  . तू मौन को जो पढ सके सुन मैं बहुत वाचाल हूँ.. .

सादर

Comment by Meena Pathak on April 5, 2013 at 4:56pm

इतनी मीठी आवाज में गीत सुन के दिल खुश हो गया ... बहुत बहुत बधाई सीमा जी 

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 5, 2013 at 12:58pm

आदरेया सीमा जी सादर, बहुत सुन्दर गीत सुनकर लगा जैसे पहले भी सुना है पुनः देखने पर समझ आया की यह ओबीओ महोत्सव में सुना था. सचमुच सुन्दर गीत यकीन मानिए आपके स्वर ने गीत में जान डाल दी है. बहुत सुन्दर पुनः बधाई. आशा करता हूँ आगे भी आपसे ऐसे ही सुन्दर गीत सस्वर सुनने को मिलते रहेंगे.

सादर.

Comment by ram shiromani pathak on April 5, 2013 at 12:02pm

इस अत्यंत ही मधुर वाणी में मधुर शब्दों का मेल एक सुखद अनुभूति दे गया..!

अद्भुत अद्भुत अद्भुत अद्भुत 

 बधाई स्वीकारें आदरेया सीमा जी।
सुन्दर प्रस्तुति!

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 5, 2013 at 3:02am

जी उठा जीवन उड़ा
बेख़ौफ़ पहने
फाग के पर
कुछ पलों को ही सही
पल कट गए संत्रास के

इस अत्यंत ही मधुर वाणी में मधुर शब्दों का मेल एक सुखद अनुभूति दे गया..!

अद्भुत, अद्वितीय, अपूर्व.. सादर शुभकामनाएँ.. आदरणीया..!!

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on April 4, 2013 at 10:48pm

ग़ज़ब ग़ज़ब ग़ज़ब

आपकी रचना और आपकी आवाज दोनों ही

बहुत बहुत बधाई हो आपको

क्या बात है

बार बार सुन रहा हूँ

सच कहूँ किसी कवियत्री को पहली बार इतना मीठा सुन रहा हूँ .........हमें आप पर गर्व है ..............लाजवाब

Comment by Vindu Babu on April 4, 2013 at 10:38pm
अनोखे रंग मे रंगी फागुई रचना के लिए सादर बधाई स्वीकारें आदरेया सीमा जी।
सुन्दर प्रस्तुति!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
Wednesday
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल…"
Mar 3
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Mar 3
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। *…See More
Mar 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
Feb 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
Feb 28

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
Feb 28
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
Feb 28

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
Feb 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
Feb 28

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service