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घनाक्षरी प्रथम प्रयास

सीस झुके है सबके ,करते हुए वन्दना
लोग न अघाते माता, माता बोले जाते है!
जिस ओर देखो उस, ओर दिखती है भीड़,
मन में कामना लिए, ध्यान किये जाते है!!

पल भर अपने को ,सब भूल जाते यहाँ ,
पूजन में लीन सब, कष्ट भूल जाते है !
जान पड़ता हैं आज,डूबे सबहि भक्ति में,
छोड़कर काम धाम, देखो चले आते है !!

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by ram shiromani pathak on April 12, 2013 at 9:48pm

आदरणीय विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय  जी आपकी बात से मै  पुर्णतः सहमत हूँ !यहाँ पर पोस्ट करने का यही कारन यही होता है आप और गुरुजन , मेरी गलती बताएँगे जिससे मै सीख सकूँ  और बेहतर लिखने का प्रयाश करूँ !!आपके अमूल्य सुझाव के लिए हार्दिक  आभार !!

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 12, 2013 at 9:37pm

आ0 रामशिरोमणि पाठक जी, प्रिय मित्र! अच्छा प्रयास, बहुत सुन्दर भाव हैं। बस आ0 विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय जी के निर्देशों पर गौर कर लें। बधाई स्वीकारें।  सादर,

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on April 12, 2013 at 6:21pm
भाई रामशिरोमणि जी! नवरात्रि के पावन पर्व पर आपने बहुत सुन्दर घनाक्षरी लिखा है। बधाई।
लेकिन क्या प्रवाह पर और अधिक समय नहीं दिया जाना चाहिये?

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