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हास्य - व्यंग . " अंगुली पर नचाती थी "

 हास्य - व्यंग

 "अंगुली पर नचाती थी"

मेरे एक दोस्त ने, किस्सा कुछ यूँ सुनाया ,
एक मामले में बीमा अफ़सर ने , घोटाला था पाया |

बात, इस हद तक थी बिगड़ी ,
इसमें लगी, उन्हें साजिश कुछ तगड़ी |

मामला था, कि एक महिला की अंगुली कटी ,
अंगुली थी मानो , हीरे से पटी |

अंगुली का हुआ लाखों भुगतान ,
इस सवाल से थे, वे बेहद परेशान |

उन्होंने तुरंत एजेंट को बुलवाया ,
नोटिस दे, भुगतान का कारण पुछवाया |

पूछा , एक अंगुली का करवा लाखों भुगतान ,
ऐसे तो दीवाला निकालेगा, तू नादान |

एजेंट बोला ,मान्यवर जहाँ तक है मेरी यादाश्त ,
महिला के पति की थी, लाखों की जायदाद |

श्रीमान जी यह सच है , मैं नहीं हूँ सिरफिरा ,
मामला बिल्कुल फिट हे ,व नतीजा बिल्कुल खरा |

ग़लत ना समझें ,
वो मेरे किसी रिश्ते नहीं आती थी ,
दरअसल, अपने पति को, उसी अंगुली पर नचाती थी |

अश्क

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 986

Comment

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Comment by अशोक कत्याल "अश्क" on April 22, 2013 at 8:54pm

respected shri ashok ji ,

comments from guru like u , boost me to fight ,

many many thanks , hope u will always encourage me .

regards  

ashok katyal

ashk

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 22, 2013 at 8:05pm

ग़लत ना समझें ,
वो मेरे किसी रिश्ते नहीं आती थी ,
दरअसल, अपने पति को, उसी अंगुली पर नचाती थी |..........वाह! बहुत खूब.

सुन्दर रचना बहुत बहुत बधाई आदरणीय.

Comment by Dr.Ajay Khare on April 18, 2013 at 5:05pm

ashok ji hasya kabhi maja hua hai badhai hasya rachna ke liye

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 17, 2013 at 6:43pm

आदरणीय अशोक कत्याल जी,  हा हा हा हह ह ह   अतिसुन्दर ।  बधाई स्वीकारें।  सादर,

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on April 17, 2013 at 5:21pm

ग़ज़ब नचाया है साहब 

वाह बधाई हो 

सादार 

Comment by vijay nikore on April 17, 2013 at 1:22pm

अशोक जी,

सच, मज़ा आ गया पढ़ कर।

विजय निकोर

Comment by ram shiromani pathak on April 17, 2013 at 12:01pm

हाहाहा,,,,,,,,,बहुत सुन्दर!हार्दिक बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 17, 2013 at 10:06am

हाहाहा हाहाहा .............बहुत ज़बरदस्त हास्य लिखा है आ० अशोक कात्याल जी 

दरअसल, अपने पति को, उसी अंगुली पर नचाती थी |...........ऐसी काम की उंगुली का बीमा तो लाखों का ही होना था ..हाहः 

बधाई इस सुन्दर हास्य पर 

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