For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कैसी जिंदगी ..लघु कथा / कुशवाहा

कैसी जिंदगी   ..लघु कथा / कुशवाहा 
------------------------------------------
समाज उत्थान , समाज सेवा ऐसा नशा है कि जिसे लग गया तो लग  गया . छूटेगा जीवन के साथ . यही हाल पुष्पा जी का है. वैसे तो उनका निश्चित समय है क्षेत्र में जाने का. पर कोई सूचना मिली या कोई फरियादी द्वार पर आ गया तो फिर क्या डाली चप्पल पैर  में और कंधे पर शाल या चदरा ,निकल पडी सेवा करने को. घर में बने, आश्रम, ही  कहिये का अलग काम तो है ही. अगर उनसे कोई पूँछ ले दीदी इतना खर्चा कैसे उठाती  हैं, क्या सरकार से धन लेती हैं. शालीनता से पुष्पा जी का जवाब होता है कि  भीख मांग के ... सेवा देना क्या सेवा है. व्यवस्था बनाइये परिवार जैसे चलातें है वैसे चलाइए .
ये कथा तो पञ्च तंत्र या कोई भी हो जैसी लंबी है. संक्षेप में कहूँ तो पुष्पा   जी भ्रमण के समय एक ऐसे परिवार में पहुंची  जिसकी मुखिया स्त्री थी ,उसके  पति का देहांत एक दुर्घटना में हो गया था..पार्वती देवी के यहाँ. पार्वती  स्वयं में पैरों  से विकलांग साथ पांच छोटी छोटी कन्यायें . खर्च से तंग आगे अन्धकार मय जीवन. पर थी साहसी और स्वाभिमानी. लिफ़ाफ़े बना, कपडे सिल परिवार पाल रही थी. 
पुष्पा  ने स्थिति भांपी और पारवती से कहा मैं तुम्हारी बड़ी बेटी शालिनी , यद्दपि ये तुम्हारा सहारा है, को अपने आश्रम ले जा रही हूँ, इसको अपने पास ही रखूंगी. इसका भी भविष्य सुधरेगा साथ ही तुम्हारी भी मदद हो जायेगी, तुम जानती हो मेरे यहाँ योग्यता अनुसार प्रशिक्षित किया जाता है और उसकी आर्थिक मदद भी हो जाती  है, यदि तुम्हें कोई आपत्ति न हो तो. पार्वती ने सहमति दे दी क्योंकि पुष्पा  जी  के स्वभाव से पारवती स्वयं भी परिचित थी. 
आश्रम में सारे  लोग एक साथ बैठ कर ही भोजन करते हैं. पुष्पा जी ने देखा शालिनी भोजन नही कर रही है, तो उसे प्यार से पास बुलाया बेटा क्या बात है तुम क्या अलग से भोजन करोगी. 
नही दीदी .ये बात नही है. जब से पापा नही रहे तब से हम सब एक ही समय भोजन करते रहे हैं.
प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा 
१८-४-२०१३ 
मौलिक/अप्रकाशित 

Views: 529

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 23, 2013 at 9:04am

आदरणीय प्रदीप जी सादर सुन्दर लघु कथा. कुछ संदेश भी मगर मन में कुछ प्रश्न भी छोड़ती है. रचना कर्म पर बहुत बहुत  बधाई स्वीकारें.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 22, 2013 at 1:37pm

आदरणीय सिंह साहब जी 

सादर/सस्नेह 

मर्म को समझा. आभार. 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 22, 2013 at 1:36pm

आदरणीया कुंती जी 

सादर अभिवादन. 

सत्य कथा पर आधारित लघु कथा है. 

प्रोत्साहन हेतु सादर आभार 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 22, 2013 at 5:46am

एक समय का भोजन ... समाज का दर्पण!

श्रद्धेय महोदय! कितनी आसानी से आपने बहुत बड़ी बात कह दी!

Comment by coontee mukerji on April 20, 2013 at 1:35am

जीवन की छोटी छोटी घटनाएं कितनी बड़ी सीख दे जाती है .इसका ज्वलंत उदाहरण है ......ये कैसी जिंदगी  ......कुश्वाहा जी . बहुत

बहुत बधाई

सादर  . कुंती .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Monday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Monday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service