For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ईश्वर ने चाहे मुझको 
खुशियाँ कम दे दी ,
मगर अच्छा किया कि
हाथ में मेरे कलम दे दी .
जब भी आँसू बहे आँखों से
शब्द बन के उतर जाते  .
होती न गर कलम हाथ में 
कैसे ग़म ये निकल पाते ,
थोड़ी सी मिली खुशियों में 
ज़हर बनके घुल जाते  .
हम घुट-घुट कर कबके 
यहाँ पर मर जाते  ,
इतना सारा ज़हर पीके हम           
भला कैसे फिर जी पाते .
इसी कलम ने ज़हर निकाला 
जब-जब दर्द ने डंक मारे ,
इसी कलम की बदौलत 
आज हम साँस है ले पाते 

Views: 384

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by POOJA AGARWAL on May 9, 2013 at 3:10pm

आप सभी का मेरी कविता "कलम " को सराहने के बहुत-बहुत धन्यवाद.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 9, 2013 at 1:21pm

ओबीओ मंच पर आपकी प्रथम रचना देख रहा हूँ ,पूजा अग्रवाल जी मन के भाव प्रकट करने का माध्यम कलम है है 

बधाई स्वीकारे 

Comment by vijay nikore on May 9, 2013 at 12:36am

आ० पूजा जी:

 

//होती न गर कलम हाथ में
कैसे ग़म ये निकल पाते ,//

 

सरल शब्दों में दर्द की सुन्दर अभिव्यक्ति।

बधाई। आशा है शीघ्र आपकी ऐसी ही और

रचनाएँ पढ़ने को मिलेंगी।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by सूबे सिंह सुजान on May 8, 2013 at 11:45pm
BHUT HI SUNDER ,,SACH KE KAREEB....MAN KO BHANE WALI KAVITAA KAHI HAI................................
ईश्वर ने चाहे मुझको
खुशियाँ कम दे दी ,
मगर अच्छा किया कि
हाथ में मेरे कलम दे दी .
जब भी आँसू बहे आँखों से
शब्द बन के उतर जाते .
होती न गर कलम हाथ में
कैसे ग़म ये निकल पाते ,
थोड़ी सी मिली खुशियों में
ज़हर बनके घुल जाते .
हम घुट-घुट कर कबके
यहाँ पर मर जाते ,
इतना सारा ज़हर पीके हम
भला कैसे फिर जी पाते .
इसी कलम ने ज़हर निकाला
जब-जब दर्द ने डंक मारे ,
इसी कलम की बदौलत
आज हम साँस है ले पाते
Comment by सूबे सिंह सुजान on May 8, 2013 at 11:45pm
BHUT HI SUNDER ,,SACH KE KAREEB....MAN KO BHANE WALI KAVITAA KAHI HAI................................
ईश्वर ने चाहे मुझको
खुशियाँ कम दे दी ,
मगर अच्छा किया कि
हाथ में मेरे कलम दे दी .
जब भी आँसू बहे आँखों से
शब्द बन के उतर जाते .
होती न गर कलम हाथ में
कैसे ग़म ये निकल पाते ,
थोड़ी सी मिली खुशियों में
ज़हर बनके घुल जाते .
हम घुट-घुट कर कबके
यहाँ पर मर जाते ,
इतना सारा ज़हर पीके हम
भला कैसे फिर जी पाते .
इसी कलम ने ज़हर निकाला
जब-जब दर्द ने डंक मारे ,
इसी कलम की बदौलत
आज हम साँस है ले पाते
Comment by Ashok Kumar Raktale on May 8, 2013 at 8:56pm

मन की बातों को बाहर लाने के अवसर को धन्यवाद करती सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीया.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 8, 2013 at 8:40am

आ0 पूजा जी, अतिसुन्दर भाव,’’इसी कलम ने ज़हर निकाला
जब.जब दर्द ने डंक मारे,
इसी कलम की बदौलत
आज हम साँस है ले पाते ’’। शुभकामनाओ सहित हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 8, 2013 at 12:08am

आपका इस मंच पर स्वागत है.  आपकी रचनाधर्मिता के पहलुओं को समक्ष करती इस रचना के लिए हार्दिक बधाई.. .

शुभेच्छाएँ

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service