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ईश्वर ने चाहे मुझको 
खुशियाँ कम दे दी ,
मगर अच्छा किया कि
हाथ में मेरे कलम दे दी .
जब भी आँसू बहे आँखों से
शब्द बन के उतर जाते  .
होती न गर कलम हाथ में 
कैसे ग़म ये निकल पाते ,
थोड़ी सी मिली खुशियों में 
ज़हर बनके घुल जाते  .
हम घुट-घुट कर कबके 
यहाँ पर मर जाते  ,
इतना सारा ज़हर पीके हम           
भला कैसे फिर जी पाते .
इसी कलम ने ज़हर निकाला 
जब-जब दर्द ने डंक मारे ,
इसी कलम की बदौलत 
आज हम साँस है ले पाते 

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Comment

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Comment by POOJA AGARWAL on May 9, 2013 at 3:10pm

आप सभी का मेरी कविता "कलम " को सराहने के बहुत-बहुत धन्यवाद.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 9, 2013 at 1:21pm

ओबीओ मंच पर आपकी प्रथम रचना देख रहा हूँ ,पूजा अग्रवाल जी मन के भाव प्रकट करने का माध्यम कलम है है 

बधाई स्वीकारे 

Comment by vijay nikore on May 9, 2013 at 12:36am

आ० पूजा जी:

 

//होती न गर कलम हाथ में
कैसे ग़म ये निकल पाते ,//

 

सरल शब्दों में दर्द की सुन्दर अभिव्यक्ति।

बधाई। आशा है शीघ्र आपकी ऐसी ही और

रचनाएँ पढ़ने को मिलेंगी।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by सूबे सिंह सुजान on May 8, 2013 at 11:45pm
BHUT HI SUNDER ,,SACH KE KAREEB....MAN KO BHANE WALI KAVITAA KAHI HAI................................
ईश्वर ने चाहे मुझको
खुशियाँ कम दे दी ,
मगर अच्छा किया कि
हाथ में मेरे कलम दे दी .
जब भी आँसू बहे आँखों से
शब्द बन के उतर जाते .
होती न गर कलम हाथ में
कैसे ग़म ये निकल पाते ,
थोड़ी सी मिली खुशियों में
ज़हर बनके घुल जाते .
हम घुट-घुट कर कबके
यहाँ पर मर जाते ,
इतना सारा ज़हर पीके हम
भला कैसे फिर जी पाते .
इसी कलम ने ज़हर निकाला
जब-जब दर्द ने डंक मारे ,
इसी कलम की बदौलत
आज हम साँस है ले पाते
Comment by सूबे सिंह सुजान on May 8, 2013 at 11:45pm
BHUT HI SUNDER ,,SACH KE KAREEB....MAN KO BHANE WALI KAVITAA KAHI HAI................................
ईश्वर ने चाहे मुझको
खुशियाँ कम दे दी ,
मगर अच्छा किया कि
हाथ में मेरे कलम दे दी .
जब भी आँसू बहे आँखों से
शब्द बन के उतर जाते .
होती न गर कलम हाथ में
कैसे ग़म ये निकल पाते ,
थोड़ी सी मिली खुशियों में
ज़हर बनके घुल जाते .
हम घुट-घुट कर कबके
यहाँ पर मर जाते ,
इतना सारा ज़हर पीके हम
भला कैसे फिर जी पाते .
इसी कलम ने ज़हर निकाला
जब-जब दर्द ने डंक मारे ,
इसी कलम की बदौलत
आज हम साँस है ले पाते
Comment by Ashok Kumar Raktale on May 8, 2013 at 8:56pm

मन की बातों को बाहर लाने के अवसर को धन्यवाद करती सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीया.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 8, 2013 at 8:40am

आ0 पूजा जी, अतिसुन्दर भाव,’’इसी कलम ने ज़हर निकाला
जब.जब दर्द ने डंक मारे,
इसी कलम की बदौलत
आज हम साँस है ले पाते ’’। शुभकामनाओ सहित हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 8, 2013 at 12:08am

आपका इस मंच पर स्वागत है.  आपकी रचनाधर्मिता के पहलुओं को समक्ष करती इस रचना के लिए हार्दिक बधाई.. .

शुभेच्छाएँ

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