For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

!!! गजल !!!
वज्न-2122, 2122, 2122, 212


तुम जो आये जिन्दगी में, बात सादर हो गयी।
जिन्दगी की सारी सरिता, आज सागर हो गयी।।


आपसी मत भेद भूले, कामना सच हैं नये।
बात रातों की करे तो, चांदनी कर हो गयी।।


हुस्न के जल्वे दिखे है, शाम शबनम की खुशी।
हम सफर जो साथ रहता, आंख कातर हो गयी।।


बन्दगी अब बन्दगी है, रंग - रंगत एक से।
आज फिर राधा-किशन है, बात सुन्दर हो गयी।।


आपकी ही बांसुरी में, गोपियों की लालसा।
राम का दर्शन कराती, मुक्ति सुखकर हो गयी।।


हम नहीं तो क्या सही है, क्या गलत है रास्ता।
आप से ही पूंछता हूं, हाल कमतर हो गयी।।


नफरतों की सोच ‘सत्यम‘,आग को अब रोक दो।
हर कदम अब छांव देखो, धूप बदतर हो गयी।।


के0पी0सत्यम/मौलिक व अप्रकाशित

Views: 731

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 15, 2013 at 9:28pm

आ0 रक्ताले सर जी,   आपके स्नेह और आशीष से सदा ही मेरा मान बढ़ता है।  आपका तहेदिल से हार्दिक अभार।  सादर,

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 15, 2013 at 8:50pm

वाह! आदरणीय केवल प्रसाद जी सुन्दर गजल. सादर बधाई स्वीकारें.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 14, 2013 at 9:59pm

आ0 विजय निकोर जी, आपके स्नेह हेतु तहेदिल से हार्दिक आभार, सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 14, 2013 at 9:58pm

आ0 राजेश कुमारी मैम जी, आपके स्नेह हेतु तहेदिल से हार्दिक आभार, सादर,

Comment by vijay nikore on May 14, 2013 at 6:16pm

आदरणीय केवल प्रसाद जी:

 

सुन्दर गज़ल के लिए बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 14, 2013 at 9:39am

बहुत सुन्दर सधी हुई ग़ज़ल देखकर   केवल प्रसाद जी आपसे अपेक्षा और बढ़ गई है फिलहाल इस ग़ज़ल के लिए दाद कबूल करें |

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 14, 2013 at 8:44am

आ0 वीनस भाई जी,  सादर प्रणाम!  गजल पर आपके स्नेह, आशीष और टिप्पणी ने मेरे मन  को अत्यधिक आश्वस्त किया है।  जी! मैं अभी भी पूर्णता संतुष्ट नहीं था किन्तु इतनी बधाईयां पाकर भी मुझे संतोष नही हुआ। जी,   अब आपके आशीष वचन से मैं कृत्य-कृत्य हुआ।  जी भाई जी,  कोई भी साधना अनवरत, अनन्त और अबाध्य गति से चलती रहती है। मैं सदैव ही इस बात को जहन में संभाल कर रखूंगा।  आपके स्नेह दृष्टि और देववचन के लिए आपका तहेदिल से बहुत-बहुत हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by वीनस केसरी on May 14, 2013 at 1:05am

केवल प्रसाद जी
ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकारें
शिल्प को साध कर खुद को एक पायदान ऊपर पहुँचा हुआ पाना निश्चित ही सुखद अनुभूति है
इसके लिए भी आपको बधाई
कहन को साधना और सुधारना निरंतर  होने वाला कार्य है जो पूरी ज़िंदगी चलता रहता है ....

कई अशआर पसंद आए

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 13, 2013 at 9:12pm

आ0 राम शिरोमणि जी,    प्रिय मित्र,  आपको ओ0बी0ओ0 पर अवकाश के बाद पुनः देखकर बड़ा हर्ष हुआ।     गजल की सराहना एवं अपार स्नेह के लिए आपका तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 13, 2013 at 9:08pm

आ0 रोशनी धीर जी,     गजल की सराहना एवं स्नेह के लिए आपका तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service