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माँ तुम्हारा वो एहसास----- कविता

 

माँ तुम्हारा वो एहसास 

माँ

                    

 तुम मेरी माँ हो,

मै ये  जानता  हूँ ;

 पहचानता हूँ .. 

 तुमने 

मेरा हाथ  थाम  

चलना सिखलाया था। .

मेरे  कदम 

जब डगमगाए थे;

तुमने 

हाथ बढ़ा थामा था।

जब भी कभी 

मै गिरा 

तुमने 

मुझे उठा 

मेरी सिर 

प्यार से सहलाया था।

 

आज 

जब तुमने 

अपना हाथ 

मुझे थमाया था,

तुम्हारा वही 

कोमल एहसास 

मुझे सहला गया था।

मुझे मालूम है :

आज मुझे 

तुम्हारा हाथ थामना है;

और 

मुझे भी तुम्हारे  

उसी एहसास को 

फिर से 

एक बार 

 जीना है।

तुमने जो मुझे दिया;

आज मुझे,

मेरी प्यारी माँ ...!

तुमको वो लौटना है।

और ...और ...

तुम्हारी 

वही ममता और स्नेह का 

अमर वरदान 

मुझे फिर से जीना 

और पाना है।

वीणा सेठी ...........

  , 

Views: 799

Comment

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Comment by Ashok Kumar Raktale on May 15, 2013 at 9:08pm

आदरणीया सुन्दर भावपूर्ण रचना किन्तु वरिष्ठ जनो से मैं भी सहमत हूँ माँ का कर्ज चुकाने की बात करना नादानी है.सादर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 15, 2013 at 5:08pm

माँ के अहसासों के साथ व्यापार या आदान-प्रदान तो होता ही नहीं. सुन्दर भावपूर्ण पंक्तियों के फेर में कुछ असंयमित भाव शब्द पा गये हैं.

वैसे आप जैसे का सतत प्रयासरत रहना काव्यजगत की मांग है.

Comment by shalini kaushik on May 14, 2013 at 12:08am

बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति .

Comment by ram shiromani pathak on May 13, 2013 at 8:52pm

सुन्दर रचना  हार्दिक बधाई वीणा जी //////

Comment by seema agrawal on May 13, 2013 at 7:40pm

माँ के ममत्व को जिया तो जा सकता परंतु लौटाया नहीं जा सकता ..सुन्दर भाव पूर्ण रचना वीणा जी बधाई 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 13, 2013 at 6:42pm

मातृ दिवस पर रची सुन्दर रचना के फ़रिए माँ का अहसास करने के लिए हार्दिक बधाई वीणा सेठी जी 

Comment by Shyam Narain Verma on May 13, 2013 at 4:37pm
बहुत बहुत बधाई इस सुन्दर रचना के लिए ……………..
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 13, 2013 at 3:49pm

तुमने जो मुझे दिया;

आज मुझे,

मेरी प्यारी माँ ...!

तुमको वो लौटना है।

और ...और ...

तुम्हारी 

वही ममता और स्नेह का 

अमर वरदान 

मुझे फिर से जीना 

और पाना है।

anvart prakriya 

saadr badhai, 

Comment by coontee mukerji on May 13, 2013 at 11:24am

बहुत सुंदर एहसास / सादर / कुंती

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