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मेरी आह के बाद ....

सुनो,
तुम तो जानती ही हो ....

मेरी ग़ज़ल,
मेरी कविताओं ...
के हर अलफ़ाज़ को ...

और ये भी,
कि ये दुनियाँ कितनी रुखी है ...
ये जमाने भर तल्खी,
अक्सर घाव कर देती है,
मुझ पर ...

फिर तितलिया ..
वक्त के साथ साथ,
फीकी पड़ जाती है,
चुभते है नाश्तर बन के रंग...

और एक कसक लिए मैं,
जमाने के दरार वाले इस पहाड़ के पीछे,
करता हूँ तुम्हारा इन्तजार ..

तुम देखना,
एक दिन ये दुनियाँ,
ताजमहल के साथ भरभरा कर,
गिर पड़ेगी मेरे सीने पर ....
और मेरी आह,
उस दरार के रास्ते से,
उतर जायेगी तुम्हारे दिल में......

सुनो,
तुम तो जानती ही हो ....
मेरी ग़ज़ल,
मेरी कविताओं ...
के हर अलफ़ाज़ के बीच ...
एक खामोशी है ...
जिस पर फ़कत तुम्हारा हक है ....

तुम इसे जरुर चुन लेना,
मेरी आह के बाद ....

सुनो,
तुम जानती तो हो ना ....
~अमितेष

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 704

Comment

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Comment by वीनस केसरी on June 19, 2013 at 9:57am

अमि तेष भाई 

सुन्दर भावाभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई 

समीक्षार्थ कुछ बातें अवश्य कहूँगा ...

कई जगह टंकण त्रुटि के कारण पढ़ने का लुत्फ़ कम होता रहा 

//
के हर अलफ़ाज़ को ... ... (अल्फ़ाज़ की जगह लफ्ज़ होना चाहिए)

तितलिया ..??

दुनियाँ, ??

वैसे भाव इतने गहरे हैं की रचना हमें डूबने नहीं देती ....

है न विरोधाभास ,,, गहराई हमें डूबने नहीं देती ... हा हा हा 

Comment by अमि तेष on June 14, 2013 at 10:48pm

Abid ali mansoori jee, aman kumar jee, Shyam Narain Verma jee, vijayashree jee,  coontee mukerji jee, Vinita Shukla jee , बृजेश नीरज jee , Sumit Naithani jee , Roshni Dhir jee,  vijay nikore jee , Rajesh Kumar Jha jee व Jitendra Pastariya jee ............... उत्साह बढाने का शुक्रिया ....
..............वैसे मुझे यहाँ समीक्षा का इन्तजार था ..............

Comment by vijayashree on June 14, 2013 at 8:48pm

सुंदर अभिव्यक्ति.........बधाई

Comment by coontee mukerji on June 14, 2013 at 1:14am

बहुत सुंदर / सादर

Comment by Vinita Shukla on June 13, 2013 at 3:05pm

दिल को छू लेने वाली सुन्दर रचना. बधाई.

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 13, 2013 at 7:42am

बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति! बधाई!

Comment by बृजेश नीरज on June 12, 2013 at 10:20pm

बहुत ही सुंदर रचना! बधाई।

Comment by Sumit Naithani on June 12, 2013 at 12:46pm

बहुत ही सुंदर रचना

Comment by Roshni Dhir on June 12, 2013 at 12:05pm

मेरी कविताओं ...
के हर अलफ़ाज़ के बीच ...
एक खामोशी है ...
जिस पर फ़कत तुम्हारा हक है ...

बहुत अच्छे अमि तेष जी ..

Comment by vijay nikore on June 12, 2013 at 10:28am

भाव अच्छे लगे। बधाई।

सादर,

वि्जय निकोर

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