For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Vinita Shukla
Share

Vinita Shukla's Friends

  • vinay tiwari
  • Vasundhara pandey
  • arvind ambar
  • Madan Mohan saxena
  • Sumit Naithani
  • Tushar Raj Rastogi
  • ajay yadav
  • aman kumar
  • अरुन शर्मा 'अनन्त'
  • Rita Singh 'Sarjana"
 

Vinita Shukla's Page

Latest Activity

Vinita Shukla commented on Usha Awasthi's blog post स्वयं को एक बार देखो
"अति सुन्दर."
Jan 29
Vinita Shukla commented on Usha Awasthi's blog post रिश्ते तो कपड़े हैं
"जनाब मुहम्मद आरिफ साहब, आप ख़ुलेआम (श्रीमती उषा अवस्थी जी, जोकि एक वरिष्ठ नागरिक हैं) को अपमानित कर रहे हैं. एक बुजुर्ग महिला, हरेक नाम के साथ आदरणीय जोड़कर लिखेगी तो अटपटा नहीं लगेगा? वे सब नामों के आगे 'जी' लगाकर संबोधित कर रही हैं. क्या…"
Oct 9, 2018
Vinita Shukla shared Usha Awasthi's discussion on Facebook
Sep 18, 2017
Vinita Shukla commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post लघुकथा : त्रिया चरित्र (गणेश जी बागी)
"किसी समाज की स्थिति, सबसे अधिक शोचनीय तभी होती है- जब पीढ़ियों में संस्कार रोपने वाली स्त्री, स्वयम अवसरवादी, चरित्रहन्ता और पथभ्रष्ट हो जाये. अत्यंत ज्वलंत प्रश्न उठाती हुई, इस रचना पर, बधाई एवं साधुवाद."
Sep 1, 2013
Vinita Shukla liked Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post लघुकथा : त्रिया चरित्र (गणेश जी बागी)
Sep 1, 2013
Vinita Shukla commented on लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's blog post यह कैसा व्यापार (दोहे)
"अंधश्रद्धा पर सटीक प्रहार करने वाले दोहे. कोटिशः बधाई आदरणीय."
Sep 1, 2013
Vinita Shukla commented on Vinita Shukla's blog post स्त्री मन की गाठें
"सुंदर शब्दों में सराहना हेतु, हार्दिक धन्यवाद, महिमा जी."
Sep 1, 2013
Vinita Shukla commented on Vinita Shukla's blog post स्त्री मन की गाठें
"आपकी इस विचारशील, काव्यात्मक प्रतिक्रिया के लिए, अतिशय आभार, आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी."
Sep 1, 2013
MAHIMA SHREE commented on Vinita Shukla's blog post स्त्री मन की गाठें
"पंख ले उमंगों केतितली सा उड़नातंग दायरों ने वेफैले पर काटेस्त्री मन की गाठें-अनगिन असंख्य गाठें कभी हुई सावित्रीकभी बनी सीताजीवन को होम कियादेवी पद जीतास्नेह लुटाया, फिर भीअंचल था रीता रिश्तों का महासमरशकुनि की बिसातेंस्त्री मन की गाठें- वाह…"
Sep 1, 2013
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on Vinita Shukla's blog post स्त्री मन की गाठें
"स्त्री मन की असंख्य गांठे लेकर रची रचना सुन्दर बन पड़ी है | महासमर सा प्रश्न है जिसकी गांठे कोई नहीं खोल पाया है -  स्त्री मन की असंख्य गांठे  चली आ रही है युग युग से  पर खोल न पाया कोई | गांठे रही है, रहेगी  देखो जैसे सांठे |…"
Sep 1, 2013
Vinita Shukla commented on Vinita Shukla's blog post स्त्री मन की गाठें
"बहुत बहुत धन्यवाद अरुण जी."
Sep 1, 2013
अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on Vinita Shukla's blog post स्त्री मन की गाठें
"बेहद सुन्दर भाव पिरोये शानदार प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीया."
Sep 1, 2013
Vinita Shukla commented on annapurna bajpai's blog post शब्द नहीं आते है ( कविता )
"निःशब्द करने वाली परिस्थितियां...हार्दिक साधुवाद अन्नपूर्णा जी."
Sep 1, 2013
Vinita Shukla commented on Vinita Shukla's blog post स्त्री मन की गाठें
"कोटिशः धन्यवाद विजयाश्री जी."
Sep 1, 2013
Vinita Shukla commented on vijayashree's blog post नई सीख
"ज़िन्दगी की जेद्दोजेहद का जीवंत वर्णन. बधाई आ. विजया जी."
Sep 1, 2013
vijayashree commented on Vinita Shukla's blog post स्त्री मन की गाठें
"अनगिन असंख्य गाठें कभी हुई सावित्रीकभी बनी सीताजीवन को होम कियादेवी पद जीतास्नेह लुटाया, फिर भीअंचल था रीता रिश्तों का महासमरशकुनि की बिसातेंस्त्री मन की गाठें-अनगिन असंख्य गाठें स्त्री मन के भावों को बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त करती सुंदर…"
Sep 1, 2013

Profile Information

Gender
Female
City State
Kochi, Kerala
Native Place
Kanpur, U.P.
Profession
Writer
About me
I am a Housewife. Writing is my passion.

Vinita Shukla's Blog

स्त्री मन की गाठें

कितने ही मरुथल

छूट गये पीछे

पगली आशाओं को

मुट्ठी में भींचे

नदिया सी रेतीली

राहों में बहती

कलुष भी वहन करतीं

धाराएँ जीवन की

अवचेतन में, गुपचुप

सुख दुःख को बांचें

स्त्री मन की गाठें-

अनगिन असंख्य गाठें !

दादी अम्मा का

भैय्या को दुलराना

चुपके से, दूध- भात

गोद में खिलाना

किन्तु 'परे हट' कहकर,

उसे दुरदुराना

रह- रहकर कोचें

वह शैशव की फासें

स्त्री मन की गाठें-

अनगिन असंख्य गाठें !

जागी…

Continue

Posted on August 31, 2013 at 3:04pm — 16 Comments

माँ की डायरी से

१- सितार के टूटे हुए तार

 वह एक भावुक, कमनीय सी लडकी; सब सहपाठी छात्राओं से, आयु में कहीं छोटी।  कई क्लासें फांदकर बारहवीं तक पहुंची थी ताकि विधवा माँ को, हर बार, फीस के पैसे न चुकाने पड़ें.  उसके अभावग्रस्त परिवार में, सपनों के लिए, कोई स्थान न था. लेकिन ख्वाबों के पर, फिर भी, निकल ही आते हैं! अम्मा ने किसी प्रकार पैसे जोड़कर, उसे एक नन्हा सा सितार दिलवाया क्योंकि स्कूल में, सितार भी एक विषय था. सितार को देखते ही, उसे रोमांच हो आया. हृदय की सुप्त उमंगें, उमड़ पड़ीं.

अब…
Continue

Posted on August 23, 2013 at 11:15am — 24 Comments

उसे नहीं बनना सिन्ड्रैला



तुम्हारे उदार आमन्त्रण पर
अब नहीं आयेगी
परीकथा की नायिका
दौड़ाकर पवन के घोड़े
लुभावने इंद्रजाल को ओढ़े-
वह एक रात की

राजकुमारी...
नही... उसे नहीं
बनना सिन्ड्रैला!
काँटों में ही खिलता है
शोख जंगली गुलाब
गुलदान का बासी पानी 

चुरा लेता, उसकी आब
चौखटे में जड़ नहीं सकता  

वजूद उसका

मुखौटों की भीड़ में वह

गुमशुदा…
Continue

Posted on August 20, 2013 at 9:37am — 14 Comments

शब्द ही तो थे

शब्द ही तो थे …

नयनों के झिलमिल
बिम्बों की भाषा

तरल सीकरों में
ढलती अभिलाषा

टूट तो जाने ही थे

अन्तस् के बंध;

विष  से उफनाये वे-

कटुता के छंद !

शब्द ही तो थे...

फट पडीं, ज्यों बेतरह
कपास की गाठें
चिंदी चिंदी  बिखर गये -

अनछुए अर्थ
विद्रोही पवन का

पाकर स्पर्श 
खुले अवगुंठन

 वह उद्दात्त मन का…

Continue

Posted on August 4, 2013 at 4:00pm — 34 Comments

Comment Wall (6 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:40am on October 16, 2012, AVINASH S BAGDE said…


झुकना पड़ा 

आसुरी प्रकृति को 

थम गया ..मेरी हार्दिक बधाई.

महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना



तव कंठ में ही 

सृष्टि का विध्वंस 

हम हो न सकते ..nayab vichar..

At 11:38am on October 16, 2012, AVINASH S BAGDE said…

महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना....badhai...

At 9:10pm on October 3, 2012,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

विनीता शुक्लजी, आपकी रचना ’हम न हो सकते नीलकंठ’ को माह की सर्वश्रेष्ठ रचना चयनित होने पर मेरी हार्दिक बधाई. आप उत्तरोत्तर बढ़ती चलें.. .

At 9:53am on October 2, 2012, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

महीने के सर्व श्रेष्ठ रचना "हम हो न सकते नीलकंठ" के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारे विनीता शुक्ल जी |आशा इस ओ बी ओ द्वारा प्राप्त पुरस्कार से उत्साहित होकर आपकी लेखनी में और निखर आएगा |मेरी हार्दिक शुभ कामनाए  

At 8:54am on October 2, 2012, Abhinav Arun said…
आदरणीया विनीता शुक्ल जी आपकी रचना को माह की श्रेष्ठ रचना के रूप में चुने जाने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !! 
At 9:04pm on October 1, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया विनीता शुक्ला जी ,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की रचना "हम हो न सकते नीलकंठ" को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना (Best Creation of the Month) पुरस्कार के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको पुरस्कार राशि रु ५५१/- और प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस नामित कृपया आप अपना नाम (चेक / ड्राफ्ट निर्गत हेतु) , Bank A/C Details तथा पत्राचार का पता व् फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी"

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"'चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव का निन्यान्बेवाँ आयोजन समाप्त हुआ। सभी सहभागियों के प्रति…"
7 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
" मार्गदर्शन हेतु सादर आभार आदरणीय"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"आपने मेरे कहे को अनुमोदित कर मेरा मान रखा, आदरणीय सत्यनारायण भाईजी।  वैसे, हिंदी भाषा में…"
8 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"समय समय पर आदरणीय आपसे एवं मंच से जुड़े सुधीजनों से अपनी प्रस्तुति पर मिले मार्गदर्शन हेतु मैं हृदय…"
8 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी, उत्साहवर्धन के लिए सादर हार्दिक आभार, नमन सादर"
8 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आदरणीय अशोक जी"
8 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी खूबसूरत छंदों से आपने दिल खोलकर रचना की तारीफ की यह सचमुच मेरे लिए उत्साहवर्धक…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्राची जी, इस बिंदू पर मैं भी कहना चाहता था, लेकिन आदरणीय सत्यनारायण जी की मराठी भाषी…"
8 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी प्रस्तुति पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु आपका हृदय से आभार आदरणीय सादर…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"सीमित साधन हों जीवन में, किंतु न हम  घबरायें। इच्छाशक्ती प्रबल आत्मबल, गुलमोहर सा…"
9 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन करती स्नेहिल टिप्पणी के लिये हार्दिक आभार प्रिय प्राची जी"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, प्रदत्त चित्र पर ताटंक आधारित सुंदर गीत रचा है आपने. हार्दिक बधाई…"
9 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service