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कविता--सबको बरसात अच्छी लगती है

सबको बरसात अच्छी लगती है

किन्तु कब तक ये अच्छी लगती है।

कम दिनों के लिये सुहानी है

थोडी-थोडी पडे तो पानी है

ज्यादा तो मौत की कहानी है

इसकी कुछ बात अच्छी लगती है

सबको बरसात अच्छी लगती है .......।

सब नदी-नाले ये चलाती है

रास्ते भी यही बनाती है

हमको चलना यही सिखाती है

हर मुलाक़ात अच्छी लगती है

सबको बरसात अच्छी लगती है........

पेड-पौधों का सबका कहना है

साथ इसके सभी को रहना है

कष्ट भी देगी तो सहना है

इसकी हर घात अच्छी लगती है

सबको बरसात अच्छी लगती है.......

इसने देखा पहाड-पत्थर है

सारी धरती करी बराबर है

यह समंदर यही सरोवर है

यह तो दिन-रात अच्छी लगती है

सबको बरसात अच्छी लगती है......

गर्मियों को पछाडने वाली

बिजलियाँ सी दहाडने वाली

रास्तों को उखाडने वाली

फिर भी बरसात अच्छी लगती है

सबको बरसात अच्छी लगती है.......।।

..................................कवि- सूबे सिंह सुजान

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by Shyam Narain Verma on June 26, 2013 at 5:17pm

 सुन्दर रचना हार्दिक बधाई स्वीकारें.........................

Comment by अरुन 'अनन्त' on June 26, 2013 at 11:43am

आदरणीय सूबे सिंह जी बरसात के गुण व अवगुण को सुन्दरता से बताया है आपने.

पेड-पौधों का सबका कहना है - इस पंक्ति में भाव स्पष्ट नहीं पा रहा है -- कदाचित मैं नहीं समझ पा रहा हूँ. बहरहाल प्रस्तुति पर बधाई स्वीकारें.

Comment by वेदिका on June 26, 2013 at 11:13am

सुंदर विचार!

बरसात अच्छी लगती है रिमझिम बरसात अच्छी लगती है, जब तक नन्हीं नन्ही बुँदे जल छलकाती रहती है बरसात रूमानी मौसम सी लगती है लेकिन जब यही बारिश जब बाढ़ बनती है तो सचमुच मौत की कहानी बनती है। 

बधाई !!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 26, 2013 at 10:52am
आदरणीय..सुबे सिंह जी, बहुत सुंदर कविता प्रस्तुत की आपने 'सचमुच बरसात सभी को अच्छी लगती है, चाहे इंसान हो या अन्य कोई प्राणी, पेड़ पौधों, नदियाँ, नाले, धरती, पहाड़ ..सभी बड़ी से इन चार महीनो का इंतजार करते है! परन्तु यही बारिश जब अपना अनुशाषन तोड़ देती है तो बड़ी समस्याऐं प्रगट हो जाती है! किसान भी बड़ी बेसब्री से बारिश का इंतजार करता है, क्योकि उसके बाकी के आठ माह बारिश पर ही निर्भर होते है! सारी धरती पर बारिश से ही इतना पानी एकञित होता है कि सभी प्राणी व पेड़ पौधे पानी का अगली बारिश तक उपयोग कर सकें! ...सुंदर कविता के लिए आदरणीय...हार्दिक बधाई व शुभकामनाऐं

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