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उन शहीदों को मेरा

सलाम है सलाम

जाँ बचाते-बचाते

दे गए अपनी जान

नाज करते हैं हम

उनके जज्बात पर

देश के मान पर

तिरंगे के सम्मान पर

जाँ बचाते रहे

बेखौफ हो निडर

एक जिद थी कि

ज्यादा से ज्याद

बचाते रहें

नेक था इरादा

काम नेक था

विधाता ने लिखा पर

कुछ और लेख था

मौत जीती मगर

हो गए वो अमर

उनको शत-शत नमन

मौलिक व अप्रकाशित

 

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Comment

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Comment by Ashok Kumar Raktale on July 14, 2013 at 12:14am

शत शत नमन. वीर शहीदों को सलाम.

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 11, 2013 at 11:36am

शत शत नमन.. आदरणीया प्रज्ञा जी हार्दिक बधाई इस अभिव्यक्ति पर.

Comment by वेदिका on July 10, 2013 at 10:10pm

बेहतरीन प्रयास आo प्रज्ञा जी!!  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 10, 2013 at 10:06pm

अमर शहीदों की कुर्बानियों को समर्पित अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक शुभकामनाएं आ० प्रज्ञा श्रीवास्तव जी 

Comment by ram shiromani pathak on July 10, 2013 at 5:25pm

सुन्दर भाव ///प्रयासरत रहें //शुभ शुभ  

Comment by coontee mukerji on July 10, 2013 at 1:18pm

एक सफल प्रयास ...लिखते रहें.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 9, 2013 at 10:00pm

आ0 प्रज्ञा जी,    अतिसुन्दर भाव पूर्ण प्रस्तुति।  सल्यूट!!!।  तहेदिल से बधाई स्वीकारें।   सादर, 

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