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फिर वही गीत दुहराओ प्रिय

 

मन की सूखी धरती पर

कुछ बूंद प्रेम जल छलकाओ प्रिय

वीरान हो चला है हृदय

कुछ प्रेम पुष खिलाओ प्रिय

फिर वही गीत दुहराओ....................

 

भग्न हदय सुप्त मन प्राण

अभिशापित सा हो चला जीवन

गहराती धुंध के बादल

कुछ  रशमियां बिखराओ प्रिय

फिर वही गीत दुहराओ...............अन्नपूर्णा

 

मौलिक एवं अप्रकाशित  

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Comment by annapurna bajpai on August 1, 2013 at 12:30pm

आदरणीय गुरु जी आपका हार्दिक आभार । आपसे यूं ही प्रेरणा मिलती रहे ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 1, 2013 at 12:37am

प्रणय का सात्विक निवेदन मुखर हुआ है, सादर धन्यवाद तथा बधाइयाँ.

सादर

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 1, 2013 at 12:33am

प्रणय का सात्विक निवेदन मुखर हुआ है. सादर बधाइयाँ.

Comment by annapurna bajpai on July 27, 2013 at 11:22am

आदरणीया शुभांगना जी आपका हार्दिक आभार ।

Comment by शुभांगना सिद्धि on July 26, 2013 at 2:20pm

भग्न हदय सुप्त मन प्राण

अभिशापित सा हो चला जीवन

गहराती धुंध के बादल

कुछ  रशमियां बिखराओ प्रिय,                   सुंदर भावाभिव्यक्ति  

Comment by annapurna bajpai on July 26, 2013 at 12:30pm

आदरणनीया महिमा जी एवं आ० अभि जी  आपका हार्दिक आभार .

Comment by Abhishek Kumar Jha Abhi on July 26, 2013 at 8:46am
बहुत सुन्दर अभिलाषित मन

सुन्दर शब्द संजोये हैं आपने … बहुत ख़ूब

Comment by MAHIMA SHREE on July 25, 2013 at 11:51pm

भग्न हदय सुप्त मन प्राण

अभिशापित सा हो चला जीवन

गहराती धुंध के बादल

कुछ  रशमियां बिखराओ प्रिय

फिर वही गीत दुहराओ......... बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति आदरणीया अन्नपूर्णा जी बहुत-२ बधाई आपको

Comment by annapurna bajpai on July 25, 2013 at 4:26pm

आ० आशुतोष मिश्रा जी , एवं आ० लक्ष्मण प्रसाद जी आपका हार्दिक आभार ।

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 25, 2013 at 10:47am

सुन्दर प्रणय गीत के लिए बधाई आदरणीया अनुपमा वाजपेयी जी 

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