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खिड़कियाँ घर की तुम खुली रखना

खिड़कियाँ घर की तुम खुली रखना 

नजरें दर पे ही तुम टिकी रखना 

फिर से परवाना न मिटे कोई 

बज्म में शम्मा मत  जली रखना 

दिल मेरा रहता बेक़रार बड़ा  

तुम जरा सी तो बेकली रखना 

कैद मुझको तू कर ले दोस्त मेरे 

जुल्फ की ही पर हथकड़ी रखना 

है हवाओं में अब जहर बिखरा 

तू मगर आदत हर भली रखना 

आरजू दिल में बस मेरे इतनी 

अपने दिल में ही अजनबी रखना 

आशु वो देगा सौं न पीने की 

तू मगर शौके मयकशी रखना 

मौलिक व अप्रकाशित 

डॉ आशुतोष मिश्र 

आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी 

बभनान, गोंडा 

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Comment

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Comment by Meena Pathak on July 26, 2013 at 7:37pm

बहुत सुन्दर गज़ल, बधाई आदरणीय 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on July 26, 2013 at 1:36pm

//yadi khuli aur jali ka upyog matle me nahee hota to kya maykashi ajnabi aaur hathkadi ke pryog jayaj hote//

.

बिल्कुल जायज़ होते डॉ आशुतोष मिश्रा जी.

Comment by विजय मिश्र on July 26, 2013 at 12:48pm
'कैद मुझको तू कर ले दोस्त मेरे
जुल्फ की ही पर हथकड़ी रखना |'
और ये
'आशु वो देगा सौं न पीने की
तू मगर शौके मयकशी रखना ' -- बेहद पसंद आई .बधाई
Comment by वीनस केसरी on July 26, 2013 at 3:09am

बहुत खूब आशुतोष जी,
ग़ज़ल पर ये प्रयास सराहनीय है ...
बधाई

कुछ अशआर बहर के हवाले से और कसे जाने चाहिए
शुभकामनाएं

Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 26, 2013 at 12:55am

aaderneeya mahima jee ..meri ghazal par aapkee utsahvardhak pratikriya keliye hardik badhayee ..saadar

Comment by MAHIMA SHREE on July 25, 2013 at 11:48pm

खुबसूरत गजल के लिए बधाई आदरणीय

Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 25, 2013 at 10:59pm

aaderneey yograj jee ..dheere dheere main ghazal kee baareekiya aap sabhee bidwat jano ke margdarshan mein seekh raha hoon ..yadi khuli aur jali ka upyog matle me nahee hota to kya maykashi ajnabi aaur hathkadi ke pryog jayaj hote .aapke is sujhav par main dhyan donga taakee iskee punravritti na ho..margdarshan ke liye hardik abhar ke sath


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on July 25, 2013 at 3:42pm

आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्र जी,  मतले में "खुली" और "जली" काफिये लेकर आप व्यंजन "ल" को हर्फ-ए-रवी मुक़र्रर कर चुके हैं अत; "हथकड़ी' "अजनबी" या "मयकशी" आदि कवाफी खारिज माने जायेंगे. कृपया इस और ध्यान दें.

Comment by Ketan Parmar on July 25, 2013 at 1:59pm

बहुत सुन्दर! हार्दिक बधाई!

Comment by बृजेश नीरज on July 25, 2013 at 10:49am

बहुत सुन्दर! हार्दिक बधाई!

कृपया ध्यान दे...

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