For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

(1)

औक़ात
भोर की दहलीज पर बैठा मैं,
ललचायी इच्छाएँ लेकर,
पर्वत निहार रहा था –
उनके शरीर से लुढ़क कर
वादियों में फैलती,
प्रभात की पहली किरण ने,
मुझे,
मेरी औक़ात बता दी.

 

(2)

दिन के झरोखे में बैठे
एक लम्बी सांस खींचे,
मैंने सूरज बनने की ठानी –
तैरते हुए बादल के
एक छोटे से टुकड़े की
छोटी सी छाँव ने,
मुझे,
मेरी औक़ात सिखा दी.

 

(3)

गोधूलि के धुँधलके में छिपकर
मैंने,
आकाश की लालिमा बनना चाहा –
क्षितिज से उमड़ते अंधकार ने
मुझे,
मेरी औक़ात दिखा दी.

 

(4)

रात्रि के नि:शब्द कोलाहल से त्रस्त
मैंने,
मुखर आकाश को टटोलना चाहा –
नक्षत्र पुंजों से टूटकर,
गिरते हुए एक तारे ने,
मुझे,
मेरी औक़ात सुना दी.

 

(5)

समय की धार पर,
अंधेरे का आंचल पकड़े
मैं बैठा रहा.
बैठा रहा मैं,
अपनी इच्छाओं का दीप जलाकर –
अडिग, अचंचल;
प्राची में उगती
स्वर्णिम छटा के मधुर स्पर्श ने
मुझको,
एक नयी औक़ात दिला दी.

 

 

(मौलिक एवम अप्रकाशित रचना)

Views: 744

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on August 1, 2013 at 2:55pm

आदरणीय सौरभ जी, ऐसी टिप्पणी मिले तो एक साधारण सी रचना को भी अपना आकाश मिल जाता है,और उसके रचनाकार को फड़फड़ाते हुए कुछ अबोध पर....जिनके सहारे वह अपनी क्षणिक उड़ान जारी रखने का दम्भ दिखा सकता है. इस प्रश्रय के लिये निरंकुश आभार.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on August 1, 2013 at 2:49pm

आदरणीया प्राची जी, आपके उदार भावनाओं ने मुझे क़लम नहीं त्यागने का एक और बहाना पकड़ा दिया है. इसी तरह मुझे प्रोत्साहित करती रहें. हार्दिक आभार.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 1, 2013 at 1:16am

क्षमता का तात्पर्य किसी की नैसर्गिक ही, किन्तु, आधिकारिक घोषणा है कि वह सबल है. परन्तु सबल होने का यह गर्वीला भाव कितना सापेक्ष हुआ करता है, इसका सुन्दर प्रस्तुतीकरण आपके पाँचों भाव-चित्र में हुआ है.  आधिकारिक होने का गर्व जब दायित्व-निर्वहन का साधन बन जाये तो उस दशा को कितने अपनत्व के साथ पाँचवाँ भाव-चित्र साझा करता है. वाह !

आदरणीय शरदिन्दुजी, आपकी इस रचना-समुच्चय के लिए मैं आपको सादर बधाइयाँ दे रहा हूँ.

शुभ-शुभ


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 31, 2013 at 10:20am

प्रकृति में व्याप्त खूबसूरत बिम्बों के माध्यम से यह बताने का प्रयास कि ''लक्ष्य की ओर बढने पर हज़ारों बार निराशाजनक असफलताएं राह में मिलती है पर अडिग हो घोर अन्धकार में भी आशाओं का दीप जलाए रखने पर, अपनी इच्छा पर कृत संकल्पित रहने पर, जीत जी किरणें लिए प्रात भी अवश्य ही होती है...

हार्दिक बधाई इस सुन्दर सोच को शब्द देने के लिए 

सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on July 29, 2013 at 4:11pm

आदरणीया गीतिका जी व मीना जी, आपने मेरी रचना पसंद की...हार्दिक आभार.

प्रिय जीतेंद्र जी, बहुत बहुत धन्यवाद.

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 27, 2013 at 8:55pm

आदरणीय शरदेन्दु जी , सुंदर रचना पर  बधाई ...

Comment by Meena Pathak on July 26, 2013 at 7:05pm

इतनी सुन्दर रचना की लिए बधाई स्वीकारें आदरणीय शरदेंदु जी 

Comment by वेदिका on July 26, 2013 at 12:29pm

खूबसूरत रचना के लिए बधाई स्वीकारिये आदरणीय शरदेन्दु जी!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on July 26, 2013 at 2:50am

आदरणीय किशन कुमार एवं श्याम नारायण वर्मा जी, आपने मेरी रचना पसंद की....हार्दिक आभार.

 

भाई बृजेश जी, आपसे प्राप्त प्रशंसा के शब्द मेरे लिये अनमोल हैं. इंसान को अपनी क्षमता पर भरपूर विश्वास होना चाहिये....इसी संदेश को संप्रेषित करने का प्रयास है रचना की अंतिम पंक्तियों में. आपने इस मूल वक्तव्य को अपनी टिप्पणी में सुंदर ढंग से उजागर किया है (//मानव की तुच्छता से लेकर संभावनाओं तक का एहसास कराया है//) हार्दिक आभार. सादर.

 

आदरणीया अन्नपूर्णा जी, आपकी प्रतिक्रिया से बड़ा संतोष मिला. मान देने के लिये आभार. सादर

Comment by annapurna bajpai on July 25, 2013 at 5:17pm

आदरणीय शारदेन्दु मुखर्जी जी इतनी अनुपम रचना के लिए हार्दिक बधाई , बहुत ही सही पंक्तियाँ लिखी हैं ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
13 hours ago
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service