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शब्दों के घेरे

 घेर लेते है मुझे

किसी चिड़िया की

मानिंद आ बैठते हैं

हृदय रूपी वृक्ष द्वार पर  

कल्पनाओं की टहनी पर

फुदक फुदक कर

बनाते है नई रचनाये

गीत कवित्त कविताएं

कल्पनाओं की उड़ान

को देते हैं हर बार

नए पंख लगा बैठते  

हर बार टहनी टहनी

मेरे नए जीवन की

हर सुबह को देते

एक सूरज नया । ............ अन्न्पूर्णा बाजपेई

 

मौलिक एवं अप्रकाशित  

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Comment

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Comment by annapurna bajpai on August 4, 2013 at 4:08pm

आदरणीय गुरु जी , आपका हार्दिक आभार । सच पूछिये तो मै अपनी रचना पर आपकी प्रतिक्रिया पाकर खुद को धनी समझ लेती हूँ , क्योंकि गुरु की प्रतिक्रिया एक ऐसा धन है जो हर एक को नहीं मिलता ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 3, 2013 at 3:38pm

रचनाकर्म की प्रक्रिया सुन्दर ढंग से विवेचि हुई है.

शुभ-शुभ

Comment by annapurna bajpai on August 1, 2013 at 11:49am

adarniya mahima ji apka hardik abhar .  

Comment by MAHIMA SHREE on July 31, 2013 at 10:52pm

गीत कवित्त कविताएं

कल्पनाओं की उड़ान

को देते हैं हर बार

नए पंख लगा बैठते  

हर बार टहनी टहनी

मेरे नए जीवन की

हर सुबह को देते

एक सूरज नया ।

आदरणीया अन्नपूर्णा जी .. बहुत ही सुंदर ..मन को मोहनेवाली अभिव्यक्ति ..बहुत -२ हार्दिक  बधाई आपको

Comment by annapurna bajpai on July 31, 2013 at 5:58pm

आदरणीय अरुण जी , बसंत जी आपका हार्दिक आभार ।

Comment by बसंत नेमा on July 31, 2013 at 1:16pm

आदरणीया जी ...इतनी खुबसुरत  सुन्दर रचना के लिये  बधाई 

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 31, 2013 at 12:49pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी बेहद सुन्दर भाव संजोये हैं आपने इस कविता में ह्रदय से बधाई स्वीकारें इस सुन्दर रचना पर.

Comment by annapurna bajpai on July 31, 2013 at 11:52am

आदरणीय बृजेश जी , आशीष जी , जितेंद्र जी उत्साह वर्धन हेतु आप सभी का हार्दिक आभार ।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 31, 2013 at 9:29am

बहुत ही सुंदर भावनाओ से ओत प्रोत पंक्तियों पर, हार्दिक बधाई आदरणीया अन्नपूर्णा जी

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on July 30, 2013 at 11:03pm

वाह, शब्दों को पंछी की उपमा देकर जीवंत कर दिया है...
बढ़िया कविता आदरणीया !
हार्दिक बधाइयाँ !!!

कृपया ध्यान दे...

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