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वो घटा आज फिर स बरसी है
मुद्दतों आँख जिस पे तरसी है

कल तलक जो मेरा मसीहा था
आज उसकी ज़बा ज़हर सी है

मर मिटा आपकी अदाओं पर
हर अदा आपकी कहर सी है

रूठ जाना ज़रा सी बातों पर
यह अदा भी तेरी हुनर सी है

खो न जाऊ तुम्हारी आँखों में
आँख "अलीम" तेरी नगर सी है

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Comment by Kanchan Pandey on May 22, 2010 at 2:24pm
कल तलक जो मेरा मसीहा था
आज उसकी ज़बा ज़हर सी है
yey ghazal bhi achhi bani hai, sunder khyal,

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 21, 2010 at 8:40pm
रूठ जाना ज़रा सी बातों पर
यह अदा भी तेरी हुनर सी है,
waah aleem bhai waah, Din par din aap ki kalam ki dhar tej hoti jaa rahi hai, bahut badhiya,
Comment by Admin on May 21, 2010 at 5:21pm
मर मिटा आपकी अदाओं पर
हर अदा आपकी कहर सी है

बहुत बढ़िया अलीम साहब , अच्छा लिख रहे है, जज्बे को बरक़रार रखिये, शुक्रिया इस पोस्ट के लिये
Comment by Ratnesh Raman Pathak on May 21, 2010 at 4:50pm
रूठ जाना ज़रा सी बातों पर
यह अदा भी तेरी हुनर सी है
mujhe yah line baut hi sundar aur dil ko chhune wali mahsus hui...........dhanyawad
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on May 21, 2010 at 3:35pm
मर मिटा आपकी अदाओं पर
हर अदा आपकी कहर सी है

रूठ जाना ज़रा सी बातों पर
यह अदा भी तेरी हुनर सी है
bahut hi shaandar aleem bhai.....keep it up.......

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 21, 2010 at 3:31pm
Lajawab Aleem bhai.

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