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हम भी कारोबार करें

मिल कर आँखे चार करें
आजा रानी, प्यार करें

जग पर तम गहराया है
भेद इसे, उजियार करें

कैसे  कैसे लोग  यहाँ           
छुपछुप  पापाचार करें

नया पैंतरा दिल्ली का
भोजन का अधिकार करें

लीडर तेरा क्या होगा
वोटर जब यलगार करें

चलो यहाँ से  'अलबेला'
हम भी  कारोबार  करें

-अलबेला खत्री
मौलिक / अप्रकाशित

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 9, 2014 at 9:40am

एक अविश्वसनीय समाचार फेस बुक पर सुन के दिल दहल गया कि अलबेला जी आकस्मिक हम सब को छोड़ चले। … क्या हुआ कैसे हुआ अभी तक कोई ठीक खबर नहीं एक नेक इंसान प्यारा दोस्त दुनिया में हँसते हंसाते सब को विदा हो गया ??? हम सब की श्रद्धांजलि प्रभु उनकी आत्मा को शांति दे और घर परिवार को ये दुःख सहने की शक्ति। ।
भ्रमर ५

Comment by Albela Khatri on August 27, 2013 at 11:13pm

आपका  अन्दाज़  भी गज़ब का है आदरणीय विजय मिश्र जी, आपकी सराहना  ने प्रफुल्लित कर दिया .  
आभारी हूँ 

Comment by Albela Khatri on August 27, 2013 at 11:11pm

आपका  स्नेहसिक्त समर्थन पा कर  रचनाकार धन्य हुआ आदर्य अन्नपूर्णा जी, आभारी हूँ 

Comment by annapurna bajpai on August 27, 2013 at 10:40pm

आ० अलबेला जी आपके नाम की तरह ही आपकी रचना भी है , बहुत खूब , आपको हार्दिक बधाई । 

Comment by विजय मिश्र on August 27, 2013 at 5:41pm
वाह ! क्या खूब बात कही ! बारिशों का मौसम है |सबकुछ अति पर है ,सम्भवतः कारोबारियों का व्यापर भी . प्यारा सा तंज भा गया अलबेलाजी .
Comment by Albela Khatri on August 27, 2013 at 12:59pm

आभारी हूँ आदरणीय शिज्जू जी
धन्यवाद


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on August 27, 2013 at 12:46pm

//नया पैंतरा दिल्ली का 
भोजन का अधिकार करें

लीडर तेरा क्या होगा 
वोटर जब यलगार करें//  वाह आदरणीय अलबेला जी बहुत खूब इस बेहतरीन रचना के लिये दाद कुबूल करें

Comment by Albela Khatri on August 27, 2013 at 11:14am

इस प्यारी  सराहना  के लिए आपका धन्यवाद  बन्धुवर  अरुन शर्मा अनंत जी,

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 27, 2013 at 11:13am

वाह सर वाह गज़ब की प्रस्तुति है मजा आ गया हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by Albela Khatri on August 27, 2013 at 11:12am

शुक्रिया  आशीष श्रीवास्तव जी,  सराहना  के लिए धन्यवाद

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