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मैं भक्त सुदामा वाला हूँ

मौलिक एवं अप्रकाशित

तुम में ही लीन प्रान मेरे , प्राणों में मेरे प्रियवर हो 
इसलिये विलग होकर भी तुम, मुझमे ही सदा निवासित हो 
अलके पलकें भी रो रोकर , दो चार अश्रु ही चढ़ा रही
मेरे भगवन मेरे प्रियतम,  बस राह धूल ही हटा रही

---

खुद के अन्दर तुम तक जाना, चरणोदक पीकर जी जाना 
इस धूल धूसरित मन से ही , अपने प्रियतम में लग जाना   
आकुल व्याकुल इस साधक पर, कुछ प्रेम सुधा बरसा जाना   
ये कठिन साधना साधक की , खुद में ही तुमसे मिल जाना 
 ---           
खुद के अन्दर झाँका हमने , तेरी सूरत ही मुझे मिली 
वात्सल्य भाव ममता झांकी , तेरी मूरत ही बनी मिली 
मीरा सी भक्ति नहीं मुझमें , चरणामृत पीने वाला हूँ 
राधा सी शक्ति नहीं मुझमे , मैं भक्त सुदामा वाला हूँ    

 ---     

जुगुनू सा भटक रहा भगवन, मैं रजनी की इस साजिश में 

मन मीन बिना जल तड़प रहा, तुमसे मिलने की कोशिश में  

मुझसे मेरी इस मैं मैं को , लो मुझसे छीन अहम मेरा  

चरणों में रहकर चरणों  में ,  सर्वस्व समर्पण है मेरा

 

आशीष श्रीवास्तव ( सागर सुमन ) 

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Comment

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 5, 2013 at 11:47am

मुझसे मेरी इस मैं मैं को , लो मुझसे छीन अहम मेरा  

चरणों में रहकर चरणों  में ,  सर्वस्व समर्पण है मेरा | ------बहुत सुन्दर भाव लिए पगी रचना के लिए हार्दिक बधाई श्री आशीष भाई 

शिक्षक दिवस पर सुमन से खिली कविता से भाव मिले

चरणों में रहकर चरणधूलि से मन के सारे मेल धुले | 

Comment by रविकर on September 5, 2013 at 9:41am

"सागर" में "सुमनों" की वर्षा, तो विष्णु बड़े संतुष्ट हुवे |
भगवान् भक्त सम्बन्ध आज, सचमुच ही पक्के पुष्ट हुवे-

बहुत बढ़िया आदरणीय-
शुभकामनायें-

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 5, 2013 at 12:08am

सुंदर रचना अभिव्यक्ति , बधाई आदरणीय आशीष जी

Comment by Meena Pathak on September 4, 2013 at 11:39pm

अति सुन्दर .... बहुत बहुत बधाई

Comment by रमेश कुमार चौहान on September 4, 2013 at 10:32pm

भावगर्भित कलात्मक रचना हेतु आदरणीय श्रीवास्तवजी आपको हार्दिक बधाई

Comment by Ashish Srivastava on September 4, 2013 at 10:22pm

श्री गिरिराज भंडारी जी 

वात्सल्य भाव से बधाई देने हेतु आभार 

Comment by Ashish Srivastava on September 4, 2013 at 10:21pm

आदरेय annapurna bajpai जी 

बधाई से  ह्रदय स्पंदित करने के लिए आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 4, 2013 at 10:13pm

आदरणीय आशीष भाई , अति सुन्दर रचना , एक कातर प्रार्थना !! बधाई !!

खुद के अन्दर झाँका हमने , तेरी सूरत ही मुझे मिली 
वात्सल्य भाव ममता झांकी , तेरी मूरत ही बनी मिली 
मीरा सी भक्ति नहीं मुझमें , चरणामृत पीने वाला हूँ 
राधा सी शक्ति नहीं मुझमे , मैं भक्त सुदामा वाला हूँ    ------------- लाजवाब !!

Comment by annapurna bajpai on September 4, 2013 at 10:10pm

आ0 अनुपम रचना के लिए बधाई स्वीकारें । 

Comment by Ashish Srivastava on September 4, 2013 at 9:17pm

आदरेय ram shiromani pathak की , रचना की रचनानात्मक बधाई के लिए आभार

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