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मैं कौन हूँ?

ये सोच कर ,
विचार कर ,
परेशान हो गया ,
मेरी सोचने की क्षमता,
बेकार हो गई !


मैं कौन हूँ  ?
मन बोला मैं पंडित ,
मेरी बातो में दम हैं ,
इस धरती पर ,
सबसे बुद्धिशाली ,
मैं सबसे गुणी ,
मगर जो ,
हश्र रावण का हुआ ,
वो सोच मैं बेजार हो गया !


मैं कौन हूँ  ?
मगर मन भटकता रहा ,
अपने बल पे गरूर था ,
डरते हैं लोग सारे ,
अच्छो अच्छो को ,
पस्त कर डाला ,
मगर जो ,
हश्र बाली का हुआ ,
वो सोच बेकरार हो गया !


मैं कौन हूँ  ?
उम्र का एक पड़ाव आया ,
तब समझ आया ,
मैं कुछ नहीं ,
बस "उसके" हाथों की ,
एक कठपुतली हूँ  !

Views: 651

Comment

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Comment by आशीष यादव on December 31, 2010 at 10:10am

उम्र का एक पड़ाव आया ,
तब समझ आया ,
मैं कुछ नहीं ,
बस "उसके" हाथों की ,
एक कठपुतली हूँ  !

bilkul sahi sir,

achchhi rachna.

Comment by Rash Bihari Ravi on December 29, 2010 at 1:25pm
dhanyabad bhaskar ji awam prabhakar bhaiya
Comment by Bhasker Agrawal on December 29, 2010 at 1:19pm
अच्छी प्रस्तुति है गुरु जी..बधाई

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 29, 2010 at 12:51pm
बहुत सुन्दर और सार्थक काव्यकृति रवि भाई - जय हो !
Comment by Lata R.Ojha on December 28, 2010 at 7:06pm
बाबा रे.. :) बात बुरी नही लगी अपितु मैं तो शर्मिंदा हूँ की शायद आपको उचित मान नही दिया . 
Comment by Rash Bihari Ravi on December 28, 2010 at 5:09pm
kyo nahi Lata di man kha aapko di bolu bol diya aapko yadi bura lagega to nahi bolunga , sath hi sath satish ji aapko dhanyabad,
Comment by satish mapatpuri on December 28, 2010 at 5:03pm

मैं कौन हूँ  ?
उम्र का एक पड़ाव आया ,
तब समझ आया ,
मैं कुछ नहीं ,
बस "उसके" हाथों की ,
एक कठपुतली हूँ  !

यथार्थ, जय हो गुरु जी
Comment by Lata R.Ojha on December 28, 2010 at 5:00pm
आपसे क्षमा चाहती हूँ की मैं आपको गिरी जी कह कर संबोधित करती रही, आप मुझे लता कहिए छोटी हूँ आपसे :) .क्या मैं आपको गिरी भाई कह सकती हूँ ?
Comment by Rash Bihari Ravi on December 28, 2010 at 1:15pm
baban ji ravina ji navin bhai lata di ganesj ji aur sir azeez sahab is iajjat afjai ke liye lakh lakh dhanyabad
Comment by Azeez Belgaumi on December 28, 2010 at 11:49am
Bahut khoob Guruji

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