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सफ़र

ओ बी ओ के संग मेरा, सफ़र पुराना भाई,

जानते नहीं जो मुझे, जान लो क़रीब से।

धन औ दौलत से भी, बड़ी चीज़ पाई मैंने,

शारदे की कृपा मिली, मुझको नसीब से।

लेखन में रुचि मेरी, लेखन ही जान मेरी,

लेखन है प्रिय मुझे, अपने हबीब से।

जियूँ तो कलम हाथ, मरूँ तो कलम साथ,

मानना हे प्रभु यह, विनती ग़रीब से।

----------------------------------- सुशील जोशी

"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by Sushil.Joshi on October 7, 2013 at 8:59pm

इस कृपा दृष्टि के लिए आपका अतिश: धन्यवाद आदरणीया डॉ. प्राची....


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 6, 2013 at 3:49pm

एक शब्द साधक के रूप में इस पावन मंच के प्रति आत्मीयता और लेखन के प्रति निष्ठा व प्रेम को सुन्दर कवित्त में व्यक्त किया है 

हार्दिक शुभकामनाएं 

Comment by Sushil.Joshi on October 6, 2013 at 1:32pm

बहुत बहुत धन्यवाद आपका आदरणीय बृजेश जी....

Comment by बृजेश नीरज on October 6, 2013 at 7:14am

नए सदस्यों को अपना परिचय उपलब्ध कराकर आपने बहुत ही पुनीत कार्य किया है! आपको  बहुत बधाई और शुभकामनायें!

सादर!

Comment by vijay nikore on October 6, 2013 at 3:06am

अति सुन्दर परिचय !

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by Sushil.Joshi on October 6, 2013 at 2:34am

स्नेहिल टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार आपका आदरणीय जितेन्द्र भाई जी...

Comment by Sushil.Joshi on October 6, 2013 at 2:33am

शुभाशीष के लिए हार्दिक धन्यवाद आपका आदरणीय अनुराग भाई साहब....

Comment by Sushil.Joshi on October 6, 2013 at 2:31am

बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय रविकर जी...

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 5, 2013 at 11:08pm

सुंदर रचना, बहुत बहुत बधाई आदरणीय शुशील जी

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on October 5, 2013 at 9:21pm

बहुत बहुत शुभ कामनाये बड़े भाई साहब ! 

कृपया ध्यान दे...

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