For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

१.

जोड़ी जुगल निहार मन, प्रेम रस सराबोर|

राधा सुन्दर मानिनी, कान्हा नवल किशोर||

२.

हरे बाँस की बांसुरी, नव नीलोत्पल गात|

रक्त कली से अधर द्वय,दरसत मन न अघात ||

Views: 556

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil.Joshi on October 24, 2013 at 4:54am

सुंदर दोहा प्रयास के लिए बधाई आ0 शालिनी जी.... बाकी आ0 सौरभ जी ने कह ही दिया है.... उस पर ध्यान अवश्य दीजिएगा...


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 19, 2013 at 8:00pm

बहुत सुन्दर कृष्णमय दोहे...

पर वाचन में प्रवाह बाधित है...यहाँ शब्द संयोजन को समझना ज़रूरी है 

आदरणीय सौरभ जी नें विस्तार से बिन्दुवत उजागर किया है..उसे ज़रूर देखें 

इन सुन्दर भावों पर हार्दिक शुभकामनाएं 

Comment by विजय मिश्र on October 19, 2013 at 5:19pm
श्रीकृष्णम् शरणम गतिः
Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on October 19, 2013 at 1:53pm

आदरणीय भाव उत्तम है उस हेतु बधाई

आदरणीय सौरभ सर के कहे को संज्ञान में लायें

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 19, 2013 at 11:47am

१.

जोड़ी जुगल निहार मन......... जोड़ी-जुगल का द्वन्द्व समास क्यों लिया आपने  जबकि दोनों के अर्थ एक ही हैं, आदरणीया ? 

प्रेम रस सराबोर................  विषम चरण का विन्यास संयत नहीं हुआ है. इसी कारण वाचन प्रवाह प्रभावित हो रहा है,
राधा सुन्दर मानिनी............. वाह वाह वाह .. मानिनी  शब्द का प्रयोग अत्यंत उत्कृष्ट है .. .

कान्हा नवल किशोर.. .......... नवल किशोर... !! . वाह-वा.. वाह-वा .. क्या ही सुन्दर छवि निखरी है !!

२.

रक्त कली से अधर द्वय........नियमों के तकनीकी पक्ष से दुविधा नहीं है लेकिन वाचन का प्रवाह क्यों बाधित है सोचियेगा. प्रस्तुतियों पर ऐसा मनन-मंथन अच्छा लगेगा..  :-))))))

दरसत मन न अघात........    इस चरण का शब्द-संयोजन भी दोषपूर्ण है, आदरणीया. अतः वाचन प्रवाह बाधित हुआ है. 

प्रयास हेतु सादर बधाइयाँ..

शुभेच्छाएँ

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 19, 2013 at 11:45am

भक्ति भाव में डूबकर, लिखते दोहे भक्त, 

सुधिजन सराह कर करे, खूब भावना व्यक्त | -हार्दिक बधाई   


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 19, 2013 at 10:38am

बहुत सुन्दर कान्हा की भक्ति रस में डूबे दोहे| हार्दिक बधाई आपको | 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 19, 2013 at 10:10am
आदरणीया , बहुत सुन्दर दोहों की रचना की है आपने !!!! हार्दिक बधाई !!!!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गिरह के साथ गजल का अच्छा प्रयास हुआ है। हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"शह्र में झूठ का कुछ ऐसा असर है साईं अब तलक सच की नहीं ख़ैर ख़बर है साईं याद है या कोई रूहानी असर है…"
1 hour ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"सुना ही था "बड़ी मुश्किल ये डगर है साईं"    राह-ए-ईमाँ का तो गुल तक भी शरर है…"
8 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" कोई  सुनता नहीं मेरी वो असर है साईं   अब तो दीदावर न कोई न वो दर है…"
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"कोख से मौत तलक रात अमर है साईंअपने हिस्से में भला कौन सहर है साईं।१।*धूप ही धूप मिली जब से सफर है…"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"सादर अभिवादन।"
21 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"स्वागतम"
23 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  प्रस्तुत नवगीत को आपसे मिला उत्साहवर्द्धन हमें प्रयासरत रखेगा, आदरणीय अशोक…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post कौन क्या कहता नहीं अब कान देते // सौरभ
"  आदरणीय रवि भसीन ’शाहिद’ जी, प्रस्तुति पर आपका स्वागत है। इस गजल को आपका अनुमोदन…"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, नमस्कार। इस प्रस्तुति पे हार्दिक बधाई स्वीकार करें। हर शेर में सार्थक विचार…"
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Saurabh Pandey's blog post कौन क्या कहता नहीं अब कान देते // सौरभ
"आदरणीय सौरभ पांडे जी, नमस्कार। बहुत सुंदर ग़ज़ल कही है आपने, इस पे शेर-दर-शेर हार्दिक बधाई स्वीकार…"
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, नमस्कार। काफ़ी देर के बाद मिल रहे हैं। इस सुंदर प्रस्तुति पे बधाई स्वीकार…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service