For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल-निलेश 'नूर'- चाँद सूरज और सितारे आ गए

२१२२, २१२२, २१२  
चाँद सूरज और सितारे आ गए,
ख्व़ाब में क्या क्या नज़ारे आ गए.    
.

ख़ूब मौका डूबने का था मिला,
और हम फिर भी किनारे आ गए. 
.

जब नज़र की बात नज़रों नें सुनी,  
दरमियाँ क्या कुछ इशारे आ गए.
.

है समाई धडकनों में धडकनें,  
पास वो इतने हमारे आ गए.
.

जब मिला ग़म या ख़ुशी कोई मिली,
आँखों में दो अश्क़ खारे आ गए.   
.
मौलिक व अप्रकाशित 
निलेश 'नूर'

Views: 853

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 14, 2013 at 6:44am

धन्यवाद 

Comment by Sushil.Joshi on November 14, 2013 at 4:42am

बहुत सुंदर गज़ल कही है आ0 नीलेश जी....


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 13, 2013 at 10:18pm

सादर आभार, आदरणीय

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 13, 2013 at 10:01pm

शुक्रिया सभी को ... व्यस्तता के चलते समुचित आभार प्रदर्शित नहीं कर पाया इसका खेद है ... आशा है आप लोग खुले हरध्य से क्षमा के देंगे ... आदरणीय सौरभ जी .. आप का सुझाव आज्ञा तुल्य है...मूल प्रति में संशोधन किये लेता हूँ 
आभार 

Comment by विजय मिश्र on November 13, 2013 at 5:52pm
वाकेई एक बहुत मीठी प्यारी सी गाज़ल .खासतौर से ये मिसरा तो दिलकश है -
" जब नज़र की बात नज़रों नें सुनी,
दरमियाँ क्या कुछ इशारे आ गए. " -- शुक्रिया निलेशजी
Comment by अरुन 'अनन्त' on November 13, 2013 at 3:22pm

आदरणीय निलेश जी कमाल की ग़ज़ल हुई है सभी शेर खूबसूरत बेमिसाल हैं ढेरों दाद कुबूल फरमाएं.

Comment by vijay nikore on November 13, 2013 at 5:14am

बहुत ही खूबसूरत गज़ल है, बधाई, आदरणीय नीलेश जी।

 

सादर,

विजय निकोर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 12, 2013 at 11:01pm

आपकी इस ग़ज़ल पर मन झूम गया आदरणीय नीलेश नूरजी. वाह वाह वाह !

यह अवश्य है कि और  को औ’ ही रहने देना था. औ’ खूब मान्य है. बाकी तो फिर से वाह वाह !
सादर

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 12, 2013 at 10:40pm

शुक्रिया सभी का ... आभार 

Comment by CHANDRA SHEKHAR PANDEY on November 12, 2013 at 9:39pm

आदरणीय इस शानदार गजल हेतु बधाई सप्रेषित करता हूँ।
- ख़ूब मौका डूबने का था मिला,
और हम फिर भी किनारे आ गए. . Yah attitude, shubhaanallaah.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
7 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Tuesday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Tuesday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service