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सत्य की अवहेलना है : अरुन शर्मा 'अनन्त'

न्याय के घर झूठ भारी
सत्य की अवहेलना है,

अब पतन निश्चित वतन का,
दण्ड सबको झेलना है,

पाप का पापड़ कहाँ तक,
मौन रहकर बेलना है.

दांव पे साँसे लगी हैं,
ये जुआ भी खेलना है,

मृत्यु की खाई में बाकी,
शेष जीवन ठेलना है....

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by Saurabh Pandey on November 19, 2013 at 6:25pm

बढिया..

कोशिश के लिए हार्दिक बधाई...

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 19, 2013 at 11:03am

मृत्यु की खाई में बाकी,
शेष जीवन ठेलना है...

शायद! आज के समय में आँखों को चकाचौंध करते खोखलेपन का अंतिम सार यही है, रचना पर हृदय से बधाई स्वीकारें आदरणीय अरुण अनंत जी

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 18, 2013 at 4:52pm

अरुण जी ..सारगर्भित , जीवन का यथार्थ दर्शाती सुंदर रचना .तहे दिल बधाई स्वीकारें 

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 18, 2013 at 4:47pm

हार्दिक आभार राजेश भाई जी

Comment by राजेश 'मृदु' on November 18, 2013 at 3:53pm

जय हो, संक्षिप्‍त एवं सुंदर प्रस्‍तुति बहुत अच्‍छी लगी, सादर

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 18, 2013 at 11:54am

हृदयतल से हार्दिक आभार आदरणीय गुरुदेव श्री

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 18, 2013 at 11:54am

हार्दिक आभार आदरणीया गीतिका जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 18, 2013 at 11:54am

हार्दिक आभार अनुज राम जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 18, 2013 at 11:53am

बहुत बहुत शुर्क्रिया आदरणीया सरिता जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 18, 2013 at 11:53am

हार्दिक आभार आदरणीय चन्द्र शेखर भाई जी

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