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***पेशानी पे मुहब्बत की यारो ……….***

पेशानी पे मुहब्बत की यारो ……….

लगता है शायद 
उसके घर की कोई खिड़की 
खुली रह गयी 
आज बादे सबा 
अपने साथ 
एक नमी का 
अहसास लेकर आयी है 
इसमें शब् का मिलन और 
सहर की जुदाई है 
इक तड़प है 
इक तन्हाई है 
ऐ खुदा 
तूने मुहब्बत भी 
क्या शै बनाई है 
मिलते हैं तो 
जहां की खबर नहीं रहती 
और होते हैं ज़ुदा 
तो खुद की खबर नहीं रहती 
छुपाते हैं सबसे 
पर कुछ छुप नहीं पाता 
लाख कोशिशों के बावज़ूद 
आँख में एक कतरा 
रुक नहीं पाता 
हिज्र की रातों में 
सितारों से बतियाते हैं 
खामोश लम्हों से 
बारहा उनके अक्स चुराते हैं 
अक्स 
जिनमें उसके आरिज़ों पर 
हया की अरुणाई है 
अक्स 
जिसमें उसके लबों पर 
प्यास थरथराई है 
अक्स 
जिसमें वो बे-हिज़ाब आई है 
आज उसकी याद ने 
मेरे दिल के निहाँख़ाने में
ली एक अंगड़ाई है 
पेशानी पे मुहब्बत की यारो 
इक लफ्ज़ लिखा तन्हाई है 
ये न उसको रास आई है 
न मुझको रास आई है

सुशील सरना

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 670

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Comment by Sushil Sarna on December 9, 2013 at 1:27pm

aadrneey Saurabh Pandey jee rachna par aapke snehaankit shabdon ka haardik aabhaar...aapke hr sujhaav mere liye kisee nageene se km naheen...aapke is sneh ka haardik aabhaar


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 7, 2013 at 11:37pm

आदरणीय सुशील सरनाजी, अभी थोड़ी देर पहले आपकी एक कविता पर अपने विचार रखे थे. अभी यह कविता... ! एकदम से अलग भावदशा को अभिव्यक्त करती हुई. समय विशेष में हृदय के भावों में भर आयी मुलामियत और फिर संभाव्य आह को आपने शब्दों में बाँधने की सुन्दर कशिश की है.

यह अवश्य है कि आपकी कविता का रचयिता संवाद स्थापित करने की कोशिश करता हुआ दीखता है. इस कारण अभिव्यक्ति में आयी नाटकीयता एक हद तक रोचक लगती है. लेकिन ऐसी मंचीय भंगिमाओं से तनिक सतर्क रहियेगा.

वैसे यह मेरी सोच भर है.

कविता के लिए हृदय से बधाई.

सादर

Comment by Sushil Sarna on December 1, 2013 at 7:34pm

hardik aabhaar Aasheesh Yadav jee aapkee is madhur pratikriya ka

Comment by आशीष यादव on December 1, 2013 at 6:46pm
बेहतरीन रचना.
Comment by Sushil Sarna on December 1, 2013 at 4:42pm

Baidya Nath Saarthi jee rachna pr aapkee sneh barkha ka haardik aabhaar

Comment by Sushil Sarna on December 1, 2013 at 4:41pm

Arun Sharma Anant jee rachna par aapkee aatmeey pratikriya ka haardik aabhaar

Comment by Saarthi Baidyanath on December 1, 2013 at 1:40pm

हिज्र की रातों में 
सितारों से बतियाते हैं 
खामोश लम्हों से 
बारहा उनके अक्स चुराते हैं .......लाजवाब ...सुन्दर भावों से सजी एक बेहतरीन रचना ...

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 1, 2013 at 12:47pm

आदरणीय सुशील जी वाह मुहब्बत में छोटी छोटी बातों को कितनी सुन्दरता से पिरोया है आपने मुहब्बतमयी रचना के हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by Sushil Sarna on December 1, 2013 at 12:38pm

aa.Sandeep Kumar Patel jee rachna par aapkee madhur prashansa ka haardik aabhaar

Comment by Sushil Sarna on December 1, 2013 at 12:38pm

aa.Giriraj Bhandari jee rachna par aapkee madhur pratikriya ka haardik aabhaar

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