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अतुकांत -- " कुरेदिये नही " ( गिरिराज भंडारी )

समय के ,

सूर्य के ताप से

सूखता हुआ मल,

स्वयम ही,

स्वाभाविक रूप से ,

हो जायेगा

दुर्गन्ध हीन |

और फिर

वातावरण स्वयम ही

हो जायेगा ,

शुद्ध ,परिशुद्ध

निर्मल |

बस ,

आप कुरेदिये नही

बारम्बार

सूखते हुये मल को |  

शायद अहं, मल का भी हो

या अहं, मल ही होता हो ||

*******************

मौलिक एवँ अप्रकाशित 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 25, 2013 at 8:26pm

आदरणीय सौरभ भाई , मेरे प्रयास को आपका आशीर्वाद मिला इससे बड़ी खुशी की बात क्या हो सकती है मेरे लिये । आपने सही कहा  अंत के दो लाइने नही जोडना था , पोस्ट करते करते बात सूझी और जोड़ दिया ॥ उत्साह वर्धक प्रतिक्रिया के लिये आपका आभारी हूँ ॥


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 25, 2013 at 8:15pm

आपके प्रयास पर मन प्रसन्न है, आदरणीय गिरिराज जी.

इस कविता के सर्वसमाही गुण को समादर देते हुए आपने यदि अंतिम दो प्ंक्तियाँ न रखीं होती तो मेरी समझ से अधिक उचित होता. वो दोनों पंक्तियाँ उपसंहार की तरह लग रही हैं.

लेकिन बहुत-बहुत बधाई आपकी रचना के लिए.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 20, 2013 at 11:22am
आदरणीय लक्ष्मण भाई , आपका कुछ न कह पाना बहुत कुछ कह दिया । आपका हार्दिक आभार ॥
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 20, 2013 at 7:54am

भाई गिरिराज जी

प्रशंसा के लिए शब्द ढूढे नहीं  मिल रहे


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 19, 2013 at 6:50pm

आदरणीया अन्नपूरणा जी , रचना की सराहना और उत्साह वर्धन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 19, 2013 at 6:48pm

आदरणीय अविनाश भाई , रचना की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 19, 2013 at 6:47pm

आदरणीय जीतेन्द्र भाई , रचना की सराहना कर उत्साह वर्धन करने के  लिये आपका आभारी हूँ ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 19, 2013 at 6:46pm

आदरणीय बड़े भाई गोपाल जी , आपका अशीर्वाद सदा मेरे साथ रहा है , आपक हृदय से आभारी हूँ । ऐसे ही स्नेह बनाये रखें ॥ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 19, 2013 at 6:42pm

आदरणीय संजय भाई , आपकी प्रतिक्रिया सदा मेरा उत्साह वर्धन करती रही है , आपका बहुत आभार । ऐसे ही स्नेह बनाये रखें ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 19, 2013 at 6:40pm

आदरणीया मीना जी , रचना की सराहना और उत्साह वर्धन के लिये आपका बहुत शुक्रिया ।

कृपया ध्यान दे...

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