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कुण्डलियां-1


कुत्ता प्यारा जीव है, वफादार बलवान।
घर की  नित रक्षा करे, रख पौरूष अभिमान।।
रख पौरूष अभिमान, गली का शेर कहाए।
चोर और अंजान, भाग कर जान बचाए।।
द्वार रहे गर श्वान, शान ज्यों माणिक मुक्ता।
पर मानव मक्कार, अहम वश कहता कुत्ता।।


के0पी0सत्यम-मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Ashok Kumar Raktale on January 5, 2014 at 10:21pm

भाई केवल प्रसाद जी सादर, रोला वाले भाग में कुछ कमियाँ है मगर कुत्ते को कुत्ता कहने में अहम् कहाँ से आ गया यह समझ नहीं आया. सादर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 26, 2013 at 9:03pm

जय हो.. .

:-)))

विश्वास है, जो कुछ आदरणीया प्राचीजी ने कहा है उस पर ध्यान देंगे.

शुभ-शुभ


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 26, 2013 at 3:47pm

श्वान गुणगान करते इस कुण्डलिया छंद पर बधाई आ० केवल प्रसाद जी 

घर की रक्षा नित करे.....इस पद्यांश में गेयता बाधित है............ घर की नित रक्षा करे ...ऐसे कर के देखें 

रख पौरूष अभिमान, गली का शेर कहाए।
चोर और अंजान, भाग कर जान बचाएं।।

इन दो पंक्तियों में भी तुकांतता दुबारा गौर चाहती है...

सादर.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on December 23, 2013 at 6:09pm

आ0 अरून अनन्त भार्इजी, आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 23, 2013 at 1:09pm

आदरणीय केवल भाई जी बेहतरीन कुण्डलिया छंद अलग अंदाज में हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on December 21, 2013 at 7:41pm

आ0 अखिलेश भाई जी, आपके जीवों के लिए अपार स्नेह और प्रेम से परिपूर्ण प्रसंशनीय उदगार हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on December 21, 2013 at 7:40pm

आ0 राजेश कुमारी जी, आपके जीवों के लिए अपार स्नेह और प्रेम से परिपूर्ण प्रसंशनीय उदगार हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on December 21, 2013 at 7:38pm

आ0  सविता  जी, आपके जीवों के लिए अपार स्नेह और प्रेम से परिपूर्ण प्रसंशनीय उदगार हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on December 21, 2013 at 7:38pm

आ0  भण्डारी भाई जी, आपके जीवों के लिए अपार स्नेह और प्रेम से परिपूर्ण प्रसंशनीय उदगार हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on December 21, 2013 at 7:37pm

आ0 श्याम नारायण  भाई जी, आपके जीवों के लिए अपार स्नेह और प्रेम से परिपूर्ण प्रसंशनीय उदगार हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

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