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सुबह का सूरज --नवगीत !

नवगीत 
********
सुबह का सूरज 
आसमान में चढ़ जाये 
 
नव प्रभात के 
शब्द-सुमन ले 
कलरव का 
उसमे चिंतन ले 
किरणो के कुछ छंद 
सलोने गढ़ जाये    …सुबह का सूरज 
 
होते इस परिपक्व 
दिवस में 
किरणे घुल जाती 
नस-नस में 
कदमों पर आरोप 
थकन के मढ़ जाये …सुबह का सूरज 
 
ढलती ये 
संध्या की  बेला
मन हो जाता 
निपट अकेला 
छोड़ मील के पत्थर 
आगे बढ़ जाये  …सुबह का सूरज 
 
सुबह का सूरज 
आसमान में चढ़ जाये 
--------------------------------------
अविनाश बागड़े   मौलिक /अप्रकाशित

Views: 898

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Comment by AVINASH S BAGDE on January 7, 2014 at 10:46pm

आदरणीय सौरभ जी धन्यवाद आपके इस शब्द -बल का जो मेरे लिए ऊर्जा-तुल्य है 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 6, 2014 at 3:18pm

वाह वाह वाह !

सही कहूँ तो आने अपने इस गीत से मन रख लिया आदरणीय अविनाश जी ! तीन बन्द और तीनों कितने स्पष्ट ! 

कलरव के चिंतन जैसे बिम्बात्मक प्रयोग के लिए बार-बार बधाई.

सादर

Comment by AVINASH S BAGDE on January 3, 2014 at 10:44pm

सभी स्नेही जनो जिन्होंने मेरी इस रचना पे अपना स्नेह उंडेला उन सब को नूतन वर्षाभिनंदन। 

Comment by AVINASH S BAGDE on January 3, 2014 at 10:42pm

आदरणीय इंजी गणेश जी ' बागी ' साहब ,ह्रदय से आभार। 

Comment by AVINASH S BAGDE on January 3, 2014 at 10:41pm

नीरज ' नीर ' जी आभार।  

Comment by AVINASH S BAGDE on January 3, 2014 at 10:40pm

आद.विजय निकोर सर ,बहुत बहुत आभार।

Comment by AVINASH S BAGDE on January 3, 2014 at 10:39pm

वर्ष २०१४ का आपका  हर दिन आपको भी उर्जावान रखे आद.लक्ष्मी प्रसाद लड़ीवाल जी //आभार 

Comment by AVINASH S BAGDE on January 3, 2014 at 10:37pm

आदरणीया डॉ. प्राची सिंह मैम ,ह्रदय से आपके उद्गारों का साधुवाद। 

Comment by AVINASH S BAGDE on January 3, 2014 at 10:35pm

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब बहुत बहुत शुक्रिया। 

Comment by AVINASH S BAGDE on January 3, 2014 at 10:34pm

महीमा श्री मैम आपने मेरी इस रचना  मान दिया ,आभार। 

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