For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

खोटा सिक्का

चले थे खुद को भुनवाने

दुनिया के इस बाजार में.

पर खोटा सिक्का मान

ठुकरा दिया ज़माने ने

सोचा ! मुझमें ही कमी थी

या, फिर वक्त का साथ न था

समझ न पाये ,और चुप रह गए

पर चैन न आया

और चल पडे दुनिया को

जानने और पहचानने

देखा ! तो जाना ,

दुनिया कितनी अजीब है

झूठ,मक्कारी और खुदगर्ज़ी

के पलड़े में हर रोज

इंसान तुल रहा 

पलड़ा जितना भारी

इंसान उतना ही ऊँचा

मेरे पास तुलने को

कुछ न था

इसलिए नकारा गया

खोटा सिक्का जान

ठुकराया गया ।

खोटा ही सही

पर खुश हूँ

दुनिया के इस झूठ

और मक्कार भरे

बाजार में

मुझे नहीं बिकना

***********

महेश्वरी कनेरी...मौलिक/अप्रकाशित

Views: 516

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 23, 2014 at 12:05pm

झूठ,मक्कारी और खुदगर्ज़ी

के पलड़े में हर रोज

इंसान तुल रहा 

पलड़ा जितना भारी

इंसान उतना ही ऊँचा

मेरे पास तुलने को

कुछ न था

इसलिए नकारा गया............

बहुत गहरी बात करती आपकी अभिव्यक्ति सचमुच बहुत पसंद आयी 

हार्दिक बधाई आ० माहेश्वरी कनेरी जी 

Comment by कल्पना रामानी on January 20, 2014 at 6:39pm

अच्छी भाव पूर्ण रचना है। बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 20, 2014 at 2:39pm

आदरणीया महेश्वरी जी अच्छी प्रस्तुतीकरण है किन्तु मेरे भीतर का पाठक संतुष्ट नहीं हुआ, खोटा सिक्का चल जाता तो जरुर मैं संतुष्ट होता. अब समय परिवर्तन चाहता है यदि मौन रहे तो न वर्तमान रहेगा और न ही भविष्य. इस सुन्दर प्रयास हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by Maheshwari Kaneri on January 18, 2014 at 8:47pm
आआदररनीय सौरभ जी ..आप के अमूल्य सुझाव के लिए.. मैंने सही कर लिया है..पुन: धन्यवाद...

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 17, 2014 at 11:44pm

मैं-कारक शैली की इस रचना के लिए धन्यवाद और शुभकामनाएँ. 

सतत अभ्यासरत रहें.

एक बात और, नाकारा और नक्कारा में अंतर होता है, आदरणीया.

सादर

Comment by Meena Pathak on January 17, 2014 at 7:58pm

हम जैसे हैं अच्छे हैं .... बहुत सुन्दर रचना , बधाई आप को | सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 17, 2014 at 7:34pm

आदरणीया महेश्वरी जी बहुत खूबसूरत भावाभिव्यक्ति है बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिये

Comment by Shyam Narain Verma on January 17, 2014 at 3:45pm
आपकी इस सुंदर प्रस्तुति पर सादर बधाई ....
Comment by coontee mukerji on January 17, 2014 at 3:12pm

अच्छी प्रस्तुतिकरण है....हर तरफ़ चाहे दुनिया के किसी कोने में इंसान जाएं....सर्वत्र ही गुण की पूजा होती है.....खोटे सिक्के का कोई मोल नहीं..सादर.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

सुरेश कुमार 'कल्याण' commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post दोहा सप्तक
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण धामी जी "
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post दोहा सप्तक
"आ. भाई सुरेश जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-119
"सादर नमस्कार आदरणीय।  रचनाओं पर आपकी टिप्पणियों की भी प्रतीक्षा है।"
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-119
"आपका हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी।नमन।।"
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-119
"आपका हार्दिक आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी।नमन।।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-119
"बहुत ही भावपूर्ण रचना। शृद्धा के मेले में अबोध की लीला और वृद्धजन की पीड़ा। मेले में अवसरवादी…"
Friday
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-119
"कुंभ मेला - लघुकथा - “दादाजी, मैं थक गया। अब मेरे से नहीं चला जा रहा। थोड़ी देर कहीं बैठ लो।…"
Friday
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-119
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी, हार्दिक बधाई । उच्च पद से सेवा निवृत एक वरिष्ठ नागरिक की शेष जिंदगी की…"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-119
"बढ़िया शीर्षक सहित बढ़िया रचना विषयांतर्गत। हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।…"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-119
"रचना पटल पर उपस्थिति और विस्तृत समीक्षात्मक मार्गदर्शक टिप्पणी हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीय तेजवीर…"
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-119
"जिजीविषा गंगाधर बाबू के रिटायर हुए कोई लंबा अरसा नहीं गुजरा था।यही दो -ढाई साल पहले सचिवालय की…"
Friday
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-119
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी साहब जी , इस प्रयोगात्मक लघुकथा से इस गोष्ठी के शुभारंभ हेतु हार्दिक…"
Friday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service