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अँधेरे रास हैं आए वफ़ा तुझसे निभाने में [गजल]

बड़ी मुश्किल से कुछ 'अपने' मिले हमको ज़माने में
कहीं उनको न खो दूँ ख्वाहिशें अपनी जुटाने में /


बने जो नाम के अपने हैं उनसे दूरियाँ अच्छी
मिलेगा क्या भला नजदीकियां उनसे बढ़ाने में/


उजाले छोड़े हैं तेरे लिए रहना सदा रोशन
अँधेरे रास हैं आए वफ़ा तुझसे निभाने में /


हसीं यादों ने छोड़े हैं सफ़र में ऐसे कुछ लम्हे
रँगें हैं हाथ अपने अब निशाँ उनके मिटाने में /


दिलों को तोड़ते हैं जो विदा कर यार को ऐसे
जो थामे धडकनें तेरी न डर अपना बनाने में /


हुई खामोश क्यों सरिता है तू आधार जीवन का
गँवाना अब नहीं तुम वक्त खुद को आजमाने में

.................मौलिक व् अप्रकाशित............

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 1, 2014 at 2:21am

आपकी यह एक बहुत ही प्रभावशाली ग़ज़ल साझा हुई है.  हार्दिक बधाई. 

दिये गये सुझावों पर ध्यान दीजियेगा

शुभ-शुभ

Comment by Sarita Bhatia on January 27, 2014 at 5:39pm

प्रिय अरुण उत्साहित करने एवं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on January 27, 2014 at 5:38pm

भाई लक्ष्मण जी हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on January 27, 2014 at 5:38pm

आदरणीया वंदना जी आभार 

Comment by Sarita Bhatia on January 27, 2014 at 5:37pm

आदरणीय गिरिराज जी हमेशा उत्साहवर्धन करने के लिए आपका हार्दिक आभार 

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 27, 2014 at 10:38am

आदरणीया सरिता जी बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल कही है आपने बेहद भावपूर्ण खूबसूरत ग़ज़ल के दिली दाद कुबूल फरमाएं.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 25, 2014 at 6:15am

आदरणीया सरिता बहन ,एक भावपूर्ण ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई .

हसीं यादों ने छोड़े हैं सफ़र में ऐसे कुछ लम्हे
रँगें हैं हाथ अपने अब निशाँ उनके मिटाने में

बहुत खूब .

Comment by vandana on January 25, 2014 at 6:03am

बहुत सुन्दर भाव आदरणीया सरिता जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 24, 2014 at 9:49pm

आदरणीया सरिता जी , जीवन की सच्चाइयों को समझाती, स्वीकारती आपके गज़ल बहुत सुन्दर बन पड़ी है , आपको हार्दिक बधाइयाँ ।

 दो बातें कहना चाह्ता हूँ - अँधेरे रास हैं आए को  अँधेरे रास आये है , जादा अच्छा लगेगा शायद  ,

और - रंगे -22 को रँगे 12 करना मेरे खयाल से सही नही है ॥    

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